बदलाव:बस्तर से नक्सलवाद की बला टली अब उद्योग-पर्यटन को मिलेगी रफ्तार

बस्तर जिला नक्सलमुक्त हो चुका है। इसके साथ ही बस्तर जिले में विकास की रफ्तार भी तेज हो चुकी है। अंदरूनी इलाकों तक पक्की सड़कों के जाल के साथ ही नेटवर्क कनेक्टिविटी, अस्पताल, राशन दुकान, स्कूल, आश्रम-छात्रावास तक बन चुके हैं। बस्तर जिले से नक्सलवाद का नामो-निशान मिट चुका है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने बस्तर जिले को एलडब्ल्यूई यानि लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म जिलों की सूची से बाहर कर दिया है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती महीने अप्रैल से ही केंद्र सरकार ने एलडब्ल्यूई के तहत बस्तर जिले को मिलने वाले करोड़ों के ग्रांट को बंद कर दिया है। बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद अब पर्यटन के विकास के साथ ही बुनियादी सुविधाएं भी विकसित होना शुरू हो गई हैं। आज बस्तर की हालिया तस्वीर पूरी तरह से उलट हो चुकी है। अब बस्तर में नक्सलियों का शोर नहीं, बल्कि विकास का कलरव सुनाई देने लगा है। नक्सलमुक्त होने के बाद बस्तर जिले में ये बड़ा बदलाव हुआ है।
चार साल पहले तक फोर्स का भी पहुंचना था मुश्किल
बस्तर वो जिला हुआ करता था, जहां से अबूझमाड़ और ओडिशा की एक बड़ी लंबी सीमा लगती थी। यहां कोलेंग, तुलसीडोगरी की पहाड़ियों पर 4 साल पहले तक फोर्स का पहुंचना मुश्किल माना जाता था। दरभा घाटी में जहां झीरम घाटी हमला हुआ था, वहां पूरी तरह नक्सलियों की सल्तनत थी। यहां अब कैंप खुल चुके हैं । चार जिलों में भी सिमटता रहा लाल गलियारा
वर्तमान में बस्तर संभाग के नारायणपुर-दंतेवाड़ा-बीजापुर जिलों से लगे अबूझमाड़ इलाके के साथ ही बीजापुर, सुकमा, कांकेर व दंतेवाड़ा के कुछ हिस्सों में अब भी नक्सलियों का वर्चस्व कायम है। इन इलाकों पर भी फोर्स लगातार मूवमेंट करते हुए नक्सलियों को काफी हद तक न्यूट्रलाइज करने में कामयाबी हासिल की है। नक्सलमुक्त बनाने की रणनीति पर काम ऐसे
एक समय में बस्तर जिले के दरभा इलाके का कोलेंग, तुलसीडोंगरी, जगदलपुर से लगे माचकोट, तिरिया, लोहंडीगुड़ा इलाके के मारडूम, ककनार, बारसूर सीमा के इलाके नक्सलियों की हुकुमत चलती थी। पुलिस ने इन इलाकों से नक्सलियों का वर्चस्व खत्म करने के लिए पूरी रणनीति पर काम किया। दरभा की झीरम घाटी में दो कैंपों सहित कोलेंग, तुलसीडोंगरी में कैंप खोले। मारडूम में कैंप व थाना, ककनार व चित्रकोट में चौकी और कैंप खोले। लोहंडीगुड़ा में सीआरपीएफ कैंप शुरू किया। इसके अलावा उस समय नक्सल प्रभावित इलाकों तक विकास पहुंचाने पक्की सड़कों का जाल बिछाने के साथ ही पूरे जिले को कॉर्डन ऑफ किया गया। दरभा इलाके में सक्रिय रहे नक्सली नेता सोनाधर को मुठभेड़ में मार गिराया गया, जिसके बाद दरभा डिवीजन के सौ से ज्यादा नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।

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