महासमुंद जिले में रविवार को नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली, जब ओडिशा स्टेट कमेटी (ओएससी) के सदस्य सुदर्शन उर्फ विकास ने अपने 14 साथियों के साथ हथियार डाल दिए। यह आत्मसमर्पण अचानक नहीं था, बल्कि इसके पीछे करीब दो महीनों तक चली गोपनीय बातचीत और विश्वास बहाली की प्रक्रिया रही। इस आत्मसमर्पण में दैनिक भास्कर के दोरनापाल संवाददाता नीरज भदौरिया की अहम भूमिका रही। सूत्रों के मुताबिक सुदर्शन लगातार मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जता रहा था। उसने मध्यस्थ के रूप में संपर्क साधा और स्पष्ट किया कि वह और उसके साथी अब हिंसा के चक्र से बाहर निकलना चाहते हैं। तय योजना के अनुसार महासमुंद जिले के बलौदा थाना क्षेत्र के जंगल में मुलाकात हुई। पूरी प्रक्रिया बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दी गई, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। बताया गया कि नक्सलियों ने पहले ही प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आत्मसमर्पण की मंशा जाहिर की थी। कांकेर जिले में पहले सरेंडर कर चुके नक्सलियों के जरिए भी संवाद स्थापित किया गया था। शनिवार देर रात समन्वय के बाद सभी को सुरक्षित मुख्यालय लाया गया। रविवार को पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के समक्ष सुदर्शन सहित 15 नक्सलियों ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। समूह में संगठन के विभिन्न स्तरों के सदस्य शामिल थे, एक स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, दो डिवीजनल कमेटी सदस्य, पांच एरिया कमेटी सदस्य और सात प्लाटून सदस्य। आत्मसमर्पण के दौरान तीन एके-47, तीन .303 राइफल, तीन 12 बोर बंदूक, दो इंसास राइफल और 14 मस्कट सहित भारी मात्रा में हथियार पुलिस को सौंपे गए। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल संगठन के कमजोर पड़ते ढांचे और पुनर्वास नीति के प्रभाव के रूप में देख रही हैं। प्रशासन का कहना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। जगदलपुर। महासमुंद जिले में बलौदा इलाके के जंगलों में आत्मसमर्पण करने के लिए पहुंुचे नक्सलियों के साथ मौजूद दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि नीरज भदौरिया।


