बरनाला जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी कन्या हाई स्कूल, गांव ठीकरीवाल की आठवीं कक्षा की छात्रा दिलप्रीत कौर को स्कूल प्रशासन ने वार्षिक परीक्षा में बैठने से रोक दिया है। इस फैसले के विरोध में छात्रा, उसके पिता सुखविंदर सिंह और माता सुमनदीप कौर ने परिवार सहित जिलाधीश कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रिंसिपल ने निजी रंजिश के चलते उनकी बेटी को परीक्षा से वंचित किया है। उनका दावा है कि प्रिंसिपल ने हाजिरी कम होने का बहाना बनाया है, जबकि दिलप्रीत कौर नियमित रूप से स्कूल जाती रही है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल उनके परिवार पर गलत नजर रखता था और जब उसे टोका गया, तो उसने बदला लेने के लिए छात्रा का भविष्य दांव पर लगा दिया।
भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और शिक्षा मंत्री से भी गुहार लगाई है कि सरकार जहां बच्चों को पढ़ाने की अपील करती है, वहीं सरकारी शिक्षक अपनी रंजिश निकालने के लिए बच्चों का साल खराब कर रहे हैं। बच्चे को हाजिरी के नाम पर परीक्षा से रोका परिजनों के अनुसार, पूरे जिले में यह एकमात्र ऐसा मामला है जहां किसी बच्चे को हाजिरी के नाम पर परीक्षा से रोका गया है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सुनीत इंद्र ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और उच्चाधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है। जांच में जुटा शिक्षा विभाग उन्होंने पुष्टि की कि पूरे जिले में यह अकेला मामला है, जिसकी हर पहलू से गहनता से जांच की जाएगी। शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती पाई जाती है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।


