बरनाला में आज पंजाब सरकार के खिलाफ जिले के सभी शिक्षक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने उपायुक्त कार्यालय के सामने एकत्र होकर सरकार विरोधी नारे लगाए और एक पत्र की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य करने के सरकार के फैसले के विरोध में किया गया। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार और हरिंदर मल्लियां और टीचर्स पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेंद्र शैहना ने इस अवसर पर बताया कि 2011 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों को 2017 में TET से छूट दी गई थी। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए पंजाब सरकार ने वह छूट वापस ले ली है। नेताओं ने कहा कि 1996, 97 या 98 में भर्ती हुए शिक्षकों पर उस समय की सेवा शर्तों के अनुसार TET की शर्त लागू करना अनुचित है। शिक्षक नेता बोले- पुराने शिक्षकों की पदोन्नति रोकने की साजिश शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे फैसलों के माध्यम से पुराने शिक्षकों को जबरन सेवानिवृत्त करने या उनकी पदोन्नति रोकने की साजिश रच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा विभाग में निजीकरण और संविदा प्रणाली को तेज करना चाहती है। नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को इतनी तत्परता से लागू करती है, तो पश्चिम बंगाल की तर्ज पर शिक्षकों का महंगाई भत्ता (DA) क्यों जारी नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से विधानसभा में अध्यादेश लाकर शिक्षकों को इस स्थिति से राहत देने की मांग की। संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए अपनी अगली रणनीति की घोषणा की। इसके तहत, 22 फरवरी को शिक्षामंत्री के चुनाव क्षेत्र श्री आनंदपुर साहिब में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सभी बोर्ड परीक्षाओं की ड्यूटी का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। इसके साथ ही, आने वाले महीने में होने वाली TET परीक्षा का भी बहिष्कार करने का आह्वान किया गया है। उन्होंने टीचरों से अपील की गई है कि वे 15 मार्च को होने वाली TET परीक्षा के लिए अप्लाई करने के बजाय संघर्ष का रास्ता अपनाएं। टीचर नेताओं ने साफ किया कि जब तक यह लेटर कैंसिल नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके पर बड़ी संख्या में टीचर और संगठनों के सदस्य मौजूद थे।


