बरलाना में BKU की बैठक में ऐलान:18 फरवरी को बठिंडा DC ऑफिस पर धरना, जेल में बंद किसान नेताओं की रिहाई मांग

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने 18 फरवरी को बठिंडा में डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय के सामने धरने का ऐलान किया है। यह धरना जेल में बंद किसान नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर किया जा रहा है। संगठन ने केंद्रीय कृषि मंत्री के पराली प्रदूषण संबंधी बयान पर भी सहमति व्यक्त की है। यह ऐलान बरनाला में हुई भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की राज्य स्तरीय बैठक के बाद किया गया। यूनियन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने बताया कि 6 और 12 फरवरी को हुए कार्यक्रमों की जानकारी साझा की गई। उन्होंने कहा कि जेल में बंद किसान नेताओं, जिनमें बलदेव सिंह और शगनदीप सिंह शामिल हैं, की रिहाई के लिए 14 फरवरी तक का समय दिया गया था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जोगिंदर सिंह ने बताया कि इसी कारण अगला कार्यक्रम 18 फरवरी को बठिंडा डीसी कार्यालय के सामने धरना होगा। पिछली बार घेराव का कार्यक्रम था, लेकिन इस बार धरने का ऐलान किया गया है। जोगिंदर सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनके साथियों को रिहा नहीं किया तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। धरने के लिए विभिन्न जिलों से नेताओं और कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। किसान यूनियन बोला- रिहाई के बाद वापस होगा धरना यूनियन ने स्पष्ट किया कि किसान नेताओं की रिहाई होने पर धरना वापस ले लिया जाएगा, अन्यथा भविष्य में और सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, यूनाइटेड फ्रंट और दूसरे संगठनों के साथ मिलकर 22 फरवरी को पूरे देश में प्रोग्राम रखा गया है। इसमें बिजली बिल 2020, मनरेगा अमेंडमेंट एक्ट, नया ट्रेड एग्रीमेंट, लेबर कोड, प्राइवेटाइजेशन विरोधी नीतियां, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को रेगुलर करना और कर्ज माफी जैसी मांगों पर जोरदार भागीदारी होगी। चंडीगढ़ में पहले हुई मीटिंग में जगहों का चुनाव कर लिया गया था और आज भी इस पर चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री के पराली को लेकर दिए बयान पर जोगिंदर सिंह ने कहा कि पराली से निकलने वाले धुएं का मुद्दा पहले जैसा नहीं रहा। अब बहुत कम लोग पराली जलाते हैं और प्रदूषण मुख्य रूप से फैक्ट्रियों, गाड़ियों और दूसरे सोर्स से होता है। उन्होंने कहा कि किसानों पर पराली थोपना गलत था और अब यह साफ हो गया है। सुनील जाखड़ के किसान नेताओं के खिलाफ दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सुनील जाखड़ को पहले अपने बयानों को वेरिफाई कर लेना चाहिए। ज्यादातर किसान नेता खेती और जमीन से अपने परिवार का गुजारा करते हैं, इसलिए ऐसे बयान बेतुके हैं। उन्होंने कहा कि सुनील जाखड़ का तो कोई बेटा भी नहीं है, जिसके बारे में वह बात कर रहे हैं।

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