बर्ड विलेज मेनार में मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल:निवृत्ति कुमारी मेवाड़ बोलीं- पक्षियों को बचाने का ग्रामीणों का जज्बा मिसाल, 19 स्टॉल्स पर दिखी कला की झलक

उदयपुर के ‘बर्ड विलेज’ मेनार में इन दिनों कुदरत और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मौका है दो दिवसीय मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल का। इसका आगाज मेवाड के पूर्व राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने किया। उन्होंने यहां के तालाब और पक्षियों के बीच वक्त बिताया और ग्रामीणों की जमकर तारीफ की। निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने कहा कि मेनार के लोगों ने पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जो काम किया है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। ग्रामीणों का अपनी प्रकृति के प्रति यह समर्पण और जागरूकता वाकई काबिले तारीफ है। उन्होंने धंड तालाब पर पक्षियों को निहारा और मृदेश्वर महादेव के दर्शन भी किए। 19 स्टॉल्स पर सजी मेवाड़ की विरासत
फेस्टिवल के पहले दिन परिसर में 19 अलग-अलग स्टॉल लगाए गए। यहां आने वाले लोगों के लिए बहुत कुछ खास था। बस्सी की प्रसिद्ध कावड़ कला से लेकर मोलेला के टेराकोटा (मिट्टी शिल्प) तक, हर स्टॉल अपनी कहानी कह रहा था। इसके अलावा ट्राइबल आर्ट, ब्लॉक प्रिंटिंग, हैंड एम्ब्रॉयडरी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी की प्रदर्शनी ने सबका मन मोह लिया। पूजा मेनारिया ने जब कविता के जरिए मेनार गांव का इतिहास सुनाया, तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया। फेस्टिवल में एक्सपर्ट्स ने ‘आर्द्रभूमि और पक्षी जीवन’ पर चर्चा की और बताया कि पर्यावरण को बचाने के लिए ये तालाब कितने जरूरी हैं। पक्षी मित्रों और होनहारों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में उन लोगों को खास तौर पर सम्मानित किया गया जो सालों से खामोशी के साथ पक्षियों की सेवा कर रहे हैं। पक्षी मित्र धर्मेंद्र मेनारिया, नितेश लोहार, कीर्ति जोशी और तिरुपति मेरावत को मोमेंटो देकर उनका हौसला बढ़ाया गया। साथ ही, दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने वाली हर्षमीता मेनारिया, खुशी मेनारिया और किशन गुर्जर का भी सम्मान हुआ। आज होगी वेटलैंड मैराथन और हेरिटेज वॉक
फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत ‘मैराथन फॉर वेटलैंड’ के साथ होगी। इसका मकसद लोगों को अपनी जल संरचनाओं के प्रति जागरूक करना है। इसके बाद गांव के बुजुर्गों और विशेषज्ञों के बीच संवाद होगा। हेरिटेज वॉक के जरिए लोग गांव की पुरानी गलियों और धरोहरों को करीब से देख सकेंगे। बच्चों के लिए कहानी सुनाने का भी एक खास सत्र रखा गया है, ताकि वे अपनी संस्कृति से जुड़ सकें। इस मौके पर डीएफओ अजय चित्तौड़ा, राहुल भटनागर, गौरव सिंघवी, डॉ. सतीश शर्मा और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

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