बलरामपुर जिला पंचायत में भाजपा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष जीते:कांग्रेस ने नहीं उतारा उम्मीद्वार, भाजपा के पूर्व विधायक हारे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव

बलरामपुर जिला पंचायत में बहुमत के साथ चुनाव में जीत हासिल करने वाली भाजपा ने आसानी से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों पर कब्जा कर लिया। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी हीरामणि निकुंज के खिलाफ पूर्व विधायक सिद्धनाथ पैकरा ने नामांकन दाखिल किया, लेकिन वे चुनाव हार गए। उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के धीरज सिंहदेव ने निर्विरोध जीत दर्ज की। बलरामपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया बुधवार को पीठासीन अधिकारी एडिशनल कलेक्टर आर. एस. लाल की मौजूदगी में शुरू हुई। इसके पूर्व अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के लिए मंत्री रामविचार नेताम की मौजूदगी में भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की बैठक में विचार-विमर्श के बाद नाम तय कर दिए गए। भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए हीरामणि निकुंज एवं उपाध्यक्ष पद के लिए धीरज सिंहदेव का नाम तय किया। 14 सदस्यीय बलरामपुर जिला पंचायत में भाजपा समर्थित 9 जिला पंचायत सदस्यों ने जीत दर्ज की थी। पूर्व विधायक अध्यक्ष पद का चुनाव हारे, भाजपा का कब्जा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए निर्धारित समय पर हीरामणि निकुंज ने अपना नामांकन दाखिल किया। भाजपा से बगावत कर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाले सामारी के भाजपा विधायक उद्धेश्वरी पैकरा के पति पूर्व संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा ने भी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में हीरामणि निकुंज को 9 एवं सिद्धनाथ पैकरा को 5 मत हासिल हुए। पीठासीन अधिकारी ने हीरामणि निकुंज को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित करते हुए प्रमाणपत्र प्रदान किया। निर्विरोध उपाध्यक्ष बनें धीरज सिंहदेव
उपाध्यक्ष पद के लिए धीरज सिंहदेव का एकमात्र नामांकन दाखिल हुआ। किसी अन्य सदस्य ने उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं किया। नामांकन की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद पीठासीन अधिकारी ने धीरज सिंहदेव को निर्विरोध उपाध्यक्ष घोषित किया धीरज सिंहदेव सरगुजा संभाग में सर्वाधिक मतों से जिला पंचायत चुनाव जीते हैं। धीरज सिंहदेव ने करीब 30 हजार मतों से चुनाव जीता था। पिछले कार्यकाल में धीरज सिंहदेव की मां राधा सिंहदेव जिला पंचायत उपाध्यक्ष थीं। निर्विरोध होना था, विरोध के बावजूद जीते
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों का निर्वाचन निर्विरोध होना था। कुछ लोगों की वजह से अध्यक्ष के लिए चुनाव की स्थिति बनीं। हालांकि सभी सदस्य एकजुट रहेे एवं चुनाव में जीत हुई। नेताम के कारण हारे, 10 सालों में काम नहीं हुआ
चुनाव हारने के बाद पूर्व विधायक सिद्धनाथ पैकरा ने कहा कि मंत्री रामविचार नेताम के कारण वे चुनाव हार गए। 10 साल उनकी पत्नी एवं बेटी जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में काम नहीं हुआ। किसी अनुभवी को अध्यक्ष बनाना था। सदस्य हैं तो काम करेंगे ही। मंत्री गड़बड़ नहीं करते तो चुनाव नहीं हारता।

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