बलौदाबाजार जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। आयकर भरने वाले और लाखों रुपये का धान बेचने वाले बड़े भू-स्वामी भी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) का राशन ले रहे हैं। यह खुलासा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए ई-केवाईसी और आधार डेटा मिलान अभियान के दौरान हुआ है। सरकार का लक्ष्य जिले के 3.58 लाख वास्तविक गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाना है, लेकिन इस योजना का लाभ अपात्र लोग भी उठा रहे हैं। जांच में पता चला है कि कई ऐसे लोग जो नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, वे भी सब्सिडी वाले राशन का लाभ ले रहे हैं। आयकर रिटर्न दाखिल करने की योग्यता ही उनकी आय को एक निश्चित सीमा से ऊपर दर्शाती है, फिर भी वे बीपीएल कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह, बड़े भू-स्वामियों द्वारा भी योजना का दुरुपयोग किया जा रहा है। जिले में 5,927 राशन कार्ड धारक ऐसे पाए गए हैं जिनके पास 5 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि है। ये किसान हर साल सरकारी खरीद केंद्रों पर लाखों रुपये का धान बेचते हैं, लेकिन साथ ही ‘गरीब’ बनकर मुफ्त या सस्ता राशन भी प्राप्त कर रहे हैं। एक लाख 29 हजार लोगों का राशन हो रहा बंद इस पूरी जांच और साफ-सफाई का एक असर यह हुआ है कि जिले के लगभग एक लाख 29 हजार लोगों का राशन आवंटन रोक दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों ने अभी तक अपना ई-केवाईसी पंजीयन (आधार सत्यापन) नहीं कराया है। जिला खाद्य अधिकारी ने इन सभी लोगों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना आधार अपडेट कराएं और ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें, ताकि वास्तविक हकदारों का राशन बंद न हो। सख्त कदम उठाने की कही बात
इन सभी गड़बड़ियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। आयकर विभाग, भू-अभिलेख और राजस्व विभाग के डेटा के साथ राशन कार्ड की जानकारी का गहन मिलान किया जा रहा है। जिन लोगों के बारे में पता चल रहा है कि वे अपात्र हैं, उनके राशन कार्ड रद्द किए जा रहे हैं। जिला खाद्य अधिकारी पुनीत राम वर्मा का कहना है कि योजना का लाभ सिर्फ और सिर्फ जरूरतमंदों तक ही पहुंचना चाहिए। धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


