मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध सांदीपनि आश्रम में बसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का केसर युक्त जल से अभिषेक किया गया और उन्हें पीले वस्त्र धारण कराए गए। पूजा में केसरिया भात, सरसों के पीले फूल और गुलाल अर्पित किए गए। यह वही पवित्र स्थल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने शिक्षा ग्रहण की थी। इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, बसंत पंचमी के दिन बच्चों का पाटी (स्लेट) पूजन कर उनका विद्यारंभ संस्कार संपन्न कराया गया। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु आश्रम में देश-विदेश से आए श्रद्धालु अपने बच्चों को शिक्षा का पहला पाठ दिलाने के लिए पहुंचे। बच्चों को मंत्रोच्चार के साथ अक्षर ज्ञान कराया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। मां सरस्वती की विशेष पूजा आश्रम के पंडित राहुल व्यास ने बताया कि बसंत पंचमी को ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती का प्रकटोत्सव माना जाता है। इस अवसर पर आश्रम में मां सरस्वती की स्थापना कर विशेष पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार बच्चों को सरस्वती के तीन मंत्र प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें पाटी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि आश्रम में बच्चों को “सांदीपनि गुरुकुल” का नाम दिया जाता है और यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क संपन्न कराई जाती है। श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। ओडिशा से आईं प्रियंका प्रधान ने बताया कि उनके क्षेत्र में विद्यारंभ को “खड़ी छुआ” कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली होने के कारण उन्होंने अपने बच्चे का विद्यारंभ संस्कार यहीं कराया। मनीषा चौहान ने अपने बच्चे से “जय श्री कृष्णा” लिखवाकर शिक्षा का शुभारंभ कराया। वहीं ममता पाटीदार ने बताया कि पूर्वजों की मान्यता है कि सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ कराने से बच्चा आगे चलकर नाम रोशन करता है। आस्था और परंपरा का अनूठा संगम बसंत पंचमी पर सांदीपनि आश्रम में आयोजित यह विद्यारंभ संस्कार आस्था, संस्कृति और शिक्षा के संगम का प्रतीक बना, जहां सैकड़ों बच्चों ने मां सरस्वती और भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद के साथ अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की।


