बहेड़िया- केवल पानी से काम नहीं चलता, आजादी के 77 साल बाद भी फोर लेन सड़क नहीं, 1989 के बाद एक भी कपड़ा उद्योग नहीं…

विश्वजीत गोले | बांसवाड़ा राजस्थान में नए निवेश की बातें हो रही हैं। बांसवाड़ा राजस्थान के अन्य जिलोें की तुलना में पानी की उपलब्धता में समृद्ध है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ के लिए यह बड़ी ताकत है फिर भी बांसवाड़ा पीछे है? आखिर वे क्या वजह हैं, जो बांसवाड़ा को पानी की भरपूर उपलब्धता के बाद भी इंडस्ट्रियल ग्रोथ की फ्रंट लाइन में आने से रोक रही हैं। सरकार, जनप्रतिनिधि, संबंधित सरकारी विभागों को ऐसा क्या करना चाहिए कि बांसवाड़ा इंडस्ट्रियल ग्रोथ करे। ऐसे ही सवालों के जवाब एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के आरएसडब्ल्यूएम लोधा यूनिट के बिजनेस हैड (यार्न) नरेंद्र कुमार बहेड़िया ने दिए। उन्होंने सबसे बड़ी बाधा फोर-लेन, एयर और रेल कनेक्टिविटी, जमीन और ट्रेंड लैबर की बताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में स्व. हरिदेव जोशी मयूर कंपनी और सिंटेक्स ग्रुप को लेकर आए। इसके बाद कोई बड़ा ग्रुप क्यों नहीं आया? सरकार ने इस पर कभी चिंतन नहीं किया। इन्वेस्टर को इनवेस्ट करना होता है, यदि उसे यहां सुविधाएं नहीं मिलेगी तो दूसरी जगह चला जाएगा। भीलवाड़ा के कई बड़े ग्रुप गुजरात और मध्यप्रदेश में चले गए। Q. सरकार ऐसे कौनसे निर्णय करें, जिससे टीएसपी एरिया में इंडस्ट्री ग्रोथ कर सकती है? A. सरकारें अगर वाकई टीएसपी का विकास चाहती हैं तो उनको सबसे पहले सड़क कनेक्टिविटी को 4 और 6 लेन करना होगा। अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ानी होगी। जिला उद्योग केंद्र को मजबूत करना होगा। लेकिन यहां तो उनकी खुद की बिल्डिंग की ही छत टूट रही है, वो इंडस्ट्रियल ग्रोथ क्या करेगा? सड़कों की हालत सुधारनी होगी। 80 किमी दूर रतलाम को ही ले लो, कितना डवलप है। न्यूक्लियर पावर प्लांट का काम शुरू हो गया है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ में इसका फायदा बांसवाड़ा को कुछ नहीं मिलेगा, पूरा फायदा रतलाम को मिलेगा। बांसवाड़ा से रतलाम के हिस्से की सड़क देख लो और अपनी हिस्से के सड़क देख लो। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। Q. बांसवाड़ा में कौनसी इंडस्ट्री के ग्रोथ करने की सबसे ज्यादा संभावना मानते हैं? A. बांसवाड़ा में फूड इंडस्ट्री और स्टार्च वाले, आटा उद्योग अच्छे चलेंगे। गेहूं, चावल, मक्का का अच्छा उत्पादन होता है। पास में ही अहमदाबाद है, जो फार्मास्टिकल का बड़ा हब है। अहमदाबाद की इन इंडस्ट्रियों को जो कच्चा माल चाहिए, वो बांसवाड़ा में है। फूड इंडस्ट्री यहां लाएं। पढ़ाई कर बच्चों को उद्योगों से जोड़ने के लिए टेक्निकल इंस्टीट्यू की जरूरत है। यहां के लोगों में जुनून देखा है। वो बाहर जाकर ट्रेनिंग लेते हैं और वहीं के हो जाते हैं। ज्यादातर लोग शिक्षक बनते हैं। अच्छी बात है लेकिन उद्यमी भी बनना चाहिए। बाहर की मेनपावर यहां आना नहीं चाहती है और यहां मिलती नहीं। Q. औद्योगिक ग्रोथ के लिए स्पेशिफिक सबसे बड़ी पांच बाधाएं कौनसी मानते हैं? A. संभागीय मुख्यालय है। तीन राज्यों से जुड़ा हुआ है लेकिन किसी भी तरफ से फोर-लेन सड़क से कनेक्टिविटी नहीं है। स्टेट हाइवे की जो सड़के हैं, उनके हालत ऐसे हैं कि रतलाम, उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ तक 100-150 किमी की दूरी तय करने में ही चार से पांच घंटे लग जाते हैं। एयर और रेल कनेक्टिविटी शून्य, स्थानीय स्तर पर ट्रेंड लैबर, उद्योगों के लिए जमीन नहीं है तो फिर इंडस्ट्रियल ग्रोथ कैसे होगी? हमारे विजिटर्स आते हैं तो सड़कों की खराब स्थिति देखकर वापस नहीं आते। Q. टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नए निवेश के लिए यहां पर क्या संभावनाएं देखते हैं? A. 35 साल पहले जो बड़े ग्रुप एलएनजे और तोषनीवाल जी का सिंटेक्स ग्रुप यहां आए, अभी भी वो ही हैं। इतने सालों में अन्य कोई बड़ा ग्रुप क्यों नहीं आया? व्यापारी नीमच, रतलाम और दाहोद जा रहे हैं लेकिन बांसवाड़ा नहीं आ रहे हैं? यहां सरकारी कर्मचारी भी नहीं आना चाहते क्योंकि मेडिकल और एजुकेशन फील्ड में अपेक्षाकृत सुविधाएं बहुत कम हैं। बांसवाड़ा नेचुरली रिच एरिया है। पानी भरपूर है लेकिन केवल पानी से काम नहीं चलता। टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है तो कपास की खेती को बढ़ावा देना होगा। मिट्टी में कपास की खेती की अच्छी तासीर है, गुणवत्ता भी अच्छी है लेकिन गिने-चुने स्थानों पर ही उगाते हैं। Q. विभागों को ऐसे क्या काम करने चाहिए जो औद्योगिक विकास में सहायक बने? A. मजबूत निर्णय करने वाले सरकारी अफसर और जनप्रतिनिधियों की जरूरत है। उद्योगों के लिए जगह और सुविधाएं दो तो इन्वेस्टर दौड़ता हुआ आएगा। सरकार को यह बात ध्यान में लानी चाहिए कि निवेशक नीति का इंतजार नहीं करेगा। Q. राजस्थान में बाकी औद्योगिक राज्यों की तुलना में बिजली महंगी है? A. उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात बना चुके हैं। गुजरात, मध्यप्रदेश की तुलना में 2 से 3 रुपए प्रति यूनिट तक महंगी बिजली है। सस्ती करनी होगी। दानपुर में थर्मल पावर प्लांट अब नहीं आना है, लेकिन उसकी 1200 एकड़ जमीन का वर्ष 2008 के बाद से कोई उपयोग नहीं हो रहा।

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