बिलासपुर| छत्तीसगढ़ बांग्ला अकादमी द्वारा टिकरापारा स्थित बंग भवन में 238वीं मासिक साहित्य सभा के साथ अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस भी मनाया गया। अध्यक्ष नमिता घोष ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां, मातृभूमि और मातृभाषा हमारे जीवन के सर्वोच्च सम्मानित स्तंभ हैं। मुख्य वक्ता डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी, डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक व अजय कुमार गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्ला भाषा को मिली मान्यता, उसके संरक्षण और संवर्धन पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि पल्लव धर ने आयोजन की सराहना की। सचिव सौभिक दास गुप्त ने बताया कि कार्यक्रम में संगठन के सक्रिय सदस्य स्व. अमित चक्रवर्ती को श्रद्धांजलि दी गई। रीता कर्मकार को “स्व. रामजीवन मुखर्जी सम्मान” से विदाई संवर्धना प्रदान की गई। निहार रंजन मल्लिक के निर्देशन में मातृभाषा आधारित समूह व एकल संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। कविता पाठ रुपा राहा और आयुष प्रामाणिक ने किया। असित बरन दास द्वारा लिखित नाटक “मानुष ओ भाषा” का मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा।


