बांसपहाड़ी ग्रामीण जलापूर्ति योजना की रफ्तार सुस्त

जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत बांसपहाड़ी में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में शुरू की गई ग्रामीण जलापूर्ति योजना की रफ्तार इन दिनों सुस्त पड़ गई है। इस योजना को 2025 में पूरा करना था लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण यह अबतक अधूरा है। अबतक मात्र 50 फीसद ही काम पूरा िकया गया है िजस वजह से अब तीन साल का और समय बढ़ा दिया गया है। 265 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य प्रखंड के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को जल संकट से स्थायी राहत मिल सके। नारायणपुर प्रखंड की लगभग दो लाख आबादी को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के तहत अब तक कुल निर्माण कार्य का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा चुका है। इसमें जल शोधन संयंत्र, पानी टंकी, पंप हाउस, मशीनरी इंस्टॉलेशन सहित अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण शामिल है। हालांकि, पाइपलाइन बिछाने का कार्य मात्र 20 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। समग्र रूप से देखा जाए तो योजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है। पाइपलाइन कार्य की धीमी प्रगति के कारण योजना का सीधा लाभ अभी तक ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सका है, जबकि परियोजना को तीन वर्षों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया था। 265 करोड़ की योजना तीन साल बाद भी आधी-अधूरी जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों से विभागीय स्तर पर राशि आवंटन नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की गति प्रभावित हुई है। धनराशि के अभाव का सीधा असर परियोजना की समय-सीमा पर पड़ा है। योजना को दिसंबर 2025 तक पूर्ण किया जाना था, लेकिन वर्तमान प्रगति को देखते हुए तय समय-सीमा में कार्य पूरा होना चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है। यदि जल्द ही लंबित राशि जारी नहीं की गई, तो परियोजना के और विलंबित होने की आशंका है। इससे लागत बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीणों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है। गर्मी में बढ़ जाती है जल समस्या : नारायणपुर प्रखंड में कुल 25 पंचायतें हैं। पंचायत स्तर पर जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पानी टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बावजूद ग्रामीणों को अब भी कुएं, चापाकल और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में जलस्तर गिरने से समस्या और गंभीर हो जाती है। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई और परिवार की दैनिक दिनचर्या पर भी पड़ता है।

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