‘हीरे जैसी रिटर्न’, ‘6 महीने में 50% मुनाफा’, ‘बागेश्वर धाम के सबसे नजदीक प्लॉट’ जैसे दावे हर दीवार पर चिपके हैं। ये दीवारें मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में बसे गढ़ा गांव की हैं। इसकी पहचान अब पूरी दुनिया में बागेश्वर धाम के नाम से है। हाल ही में यहां धीरेंद्र शास्त्री ने 305 गरीब, दलित और जरूरतमंद लड़कियों का सामूहिक विवाह कराया। दावा है कि कार्यक्रम में 10 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे और 200 एकड़ में पांडाल सजा। इस भव्य आयोजन के बीच एक और तस्वीर उभरकर सामने आई- समूचे गांव में धार्मिक कार्यक्रम के पोस्टरों से ज्यादा कॉलोनियों, प्लॉट्स और लैंड प्रोजेक्ट्स के बैनर लगे मिले। दैनिक भास्कर की टीम ने जब इन प्रोजेक्ट्स की जमीनी हकीकत जानने के लिए गढ़ा गांव में पड़ताल की, तो सामने आया खेती की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का बड़ा नेटवर्क फल-फूल रहा है। गांव में बागेश्वर धाम के कारण जमीनों की कीमतें भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो गई है, इसी का फायदा उठाने के लिए आज गढ़ा गांव में दर्जनभर से ज्यादा कॉलोनाइजर खेतों में प्लॉट बेच रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पड़ताल में ये बातें सामने आईं – दर्जनभर कॉलोनाइजर ½-2 एकड़ में बिना प्लानिंग के कॉलोनियां काट रहे।
– गांववालों से सस्ते में खरीदी खेती की जमीन को आवासीय/कमर्शियल प्लॉट्स के रूप में बेचा जा रहा (बिना लैंड यूज चेंज)।
– खरीदने वालों को लालच: बागेश्वर धाम से 6 महीने में 50-60% मुनाफा।
– न कोई अनुभव, न प्लानिंग; नाली, पानी, बिजली, सड़क जैसी सुविधाएं लगभग नदारद।
– प्रशासनिक हस्तक्षेप पर धमकी: ‘हम यहां बैठे हैं, कोई दिक्कत नहीं होगी।’ जानिए भास्कर ने कैसे एक्सपोज किया ये फर्जीवाड़ा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर कुछ कॉलोनाइजर्स के पास जमीन खरीदने के बहाने मिले और यह जानने की कोशिश की कि बागेश्वर धाम की आढ़ में कैसे लोगों को ठगने की कोशिश हो रही है… इन कॉलोनियों की गड़बड़ी समझिए… क्या हो रहा– खेती की जमीन पर बिना डायवर्जन के कॉलोनियां काट दी गई हैं। इस कॉलोनी में न तो सड़क बनी और न ही स्ट्रीट लाइट के पोल हैं, लेकिन यहां रेसिडेंशियल और कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही है। सारा प्रोजेक्ट अवैध है। धीरेंद्र शास्त्री के बड़े पापा के बेटे की दो कॉलोनियां बागेश्वर धाम स्थित बागेश्वर बालाजी मंदिर के रास्ते पर एक बिल्डिंग पर बागेश्वर धाम प्रॉपर्टीज का पोस्टर लगा था। जिस पर राघवपुरम कॉलोनी, बागेश्वर धाम, गढ़ा लिखा हुआ था। कॉलोनी का नक्शा भी बना था। हमने इस पोस्टर पर लिखे नंबर पर कॉल कर प्रॉपर्टी देखने की बात कही। फोन अखिलेश गर्ग नाम के व्यक्ति ने उठाया था। हमें ऑफिस में बैठने को कहा गया। उन्होंने कहा कि वे एक लड़के को भेज रहे हैं जो हमें साइट पर ले आएगा। ऑफिस में अखिलेश गर्ग के बारे में पूछने पर बताया कि वे दादा गुरु हैं। दादा गुरु धीरेंद्र शास्त्री के बड़े पापा के लड़के हैं। बागेश्वर धाम और गांव गढ़ा में इनका प्रॉपर्टी का बड़ा काम है। हमने ऑफिस में बैठकर इस प्रोजेक्ट का नक्शा देखा। पता चला कि अभी दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। एक राघवपुरम और दूसरा सनातन धाम के नाम से। दोनों जगह मिलाकर करीब 100 से ज्यादा प्लॉट है। ये दोनों ही बागेश्वर धाम मंदिर से 500 मीटर और गुरुजी निवास से 300 मीटर दूर है। दोनों प्रोजेक्ट 3-4 माह पहले शुरू, धड़ल्ले से बिक रहे प्लॉट हमें साइट दिखाने आए शख्स ने ऑफिस में पूरे प्रोजेक्ट की डिटेल बताई। यहां जमीन खरीदने के लिए कम से कम आपको 25 से 30 लाख रुपए प्रति हजार स्क्वायर फीट खर्च करने पड़ेंगे। इससे कम पर कोई सौदा नहीं हो पाएगा। राघवपुरम कैंपस में जमीन की कीमत 2500 से लेकर 4000 रुपए प्रति स्क्वायर फीट है। ये कीमतें आप जो प्लॉट पसंद करेंगे, उसकी लोकेशन के हिसाब से तय होगी। आगे बताया कि दोनों प्रोजेक्ट 3-4 महीने पहले शुरू हुए हैं। इसके अलावा पहले से भी कुछ प्रोजेक्ट हैं, जिनके लगभग सभी प्लॉट बिक चुके हैं। राघवपुरम में भी ज्यादा से ज्यादा 2 से 3 महीने में सारे प्लॉट बुक हो जाएंगे। यहां सबसे बड़ी बात है कि 2027 में कैंसर हॉस्पिटल बनकर तैयार हो जाएगा, तब तक यहां जमीन की कीमत हीरे से भी ज्यादा हो जाएगी। रिपोर्टर और प्रॉपर्टी डीलर के बीच की बातचीत पढ़िए… भास्कर रिपोर्टर- मेरी जमीन क्या यहां सुरक्षित रहेगी? हमें यहां सिर्फ इन्वेस्टमेंट के हिसाब से जमीन लेनी है।
डीलर- आप अपनी जमीन पर चार पिलर खड़े कर दीजिए। उसके बाद आप भूल जाइए। आपकी जमीन 1 इंच भी कोई इधर से उधर नहीं कर सकता। भास्कर रिपोर्टर- जमीनों के भाव पिछले 1 साल में कितने बढ़े हैं?
डीलर- 1500 रुपए प्रति वर्ग फीट वाले प्लॉट अब 2500 रुपए प्रति वर्ग फीट के हो गए और 3000-3500 रुपए प्रति वर्ग फीट वाले प्लॉट की कीमत आज 5000 रुपए स्क्वायर फीट हो गई है। हमारे यहां लोन का कोई सिस्टम नहीं है। वो आप अपने हिसाब से देखो। यहां से हम राघव पुरम में पहुंचे। यहां टेंट लगाकर तीन- चार लोग बैठे हुए थे। हमें यहां अखिलेश गर्ग मिले। जिन्हें यहां लोग बड़े दादा कह रहे थे। कॉलोनाइजर अखिलेश गर्ग से भास्कर रिपोर्टर की बातचीत… रिपोर्टर- इस कॉलोनी को किसने डेवलप किया है? अखिलेश- मैं ही इस जमीन का मालिक हूं। मैंने अभी दो प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। इसके अलावा सनातन धाम प्रोजेक्ट भी है। इस कॉलोनी से महाराज जी का नया आवास पास ही है। कॉलोनी में डामर रोड डलवा कर देंगे, नाली बनवा कर देंगे। (फिलहाल कच्ची सड़क है। न नाली बनी है और न ही स्ट्रीट लाइट के पोल लगे हैं।) रिपोर्टर- यहां निर्माण कब शुरू कर सकते हैं? अखिलेश- यहां आप होटल बनाएं, दुकान बनाएं या फिर घर या आश्रम बनाएं। जिस दिन रजिस्ट्री हो जाए उसी दिन से आपको जाे बनाना है, बनाइए। जब हमने उनसे पूछा कि पैसे कैसे देने हैं तो उसके लिए उन्होंने बताया की 10 दिन के अंदर पूरी राशि एकमुश्त देनी है। रिपोर्टर- किसी तरह का फ्रॉड तो नहीं होगा? अखिलेश- आप भरोसा कर के देखिए। हमने कह दिया वह पत्थर की लकीर है। रिपोर्टर- हमने दूसरे प्रोजेक्ट्स भी देखें हैं, लेकिन भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। राणा रावत का संन्यासी धाम भी देखा। अखिलेश- हम दूसरे की नहीं, सिर्फ हमारी गारंटी ले सकते हैं। आप कहीं और जाओगे तो इसका हमें नहीं पता। राणा ने तो 75 लोगों को फांस रखा है। रिपोर्टर- इस जमीन का लैंड यूज क्या है? अखिलेश- अभी तो ये सारी कृषि भूमि है, लेकिन आपको जो करना है वो आराम से करो। हम बैठे हैं। कोई दिक्कत नहीं आएगी। आप कहेंगे तो रजिस्ट्री के बाद बदलवा भी देंगे। रिपोर्टर- यहां कमर्शियल एक्टिविटी में कोई दिक्कत तो नहीं आएगी? अखिलेश- अरे, आप यहां कुछ भी काम करिए कम से कम 30 हजार महीना बन जाएगा। मेरी धाम में 80 से ज्यादा दुकानें हैं, इनको बेचा नहीं है। इनका 1 लाख से 20 हजार रुपए महीना किराया आता है। मैं हर महीने 20 लाख रूपए उठाता हूं। धाम आने वाला हर एक आदमी इस कॉलोनी के बाहर से निकल रही मेन रोड के सामने से ही गुजरेगा। रिपोर्टर- राशि कैसे चुकानी पड़ेगी? अखिलेश- कम से कम 50 परसेंट राशि का भुगतान रजिस्ट्री से पहले करना पड़ेगा। रजिस्ट्री के 10 दिन में सारा भुगतान करना पड़ेगा। रिपोर्टर- लोन मिलने में कोई दिक्कत तो नहीं होगी? अखिलेश- हम आपको पूरी लिखा-पढ़ी करके देंगे, जिससे आपको लोन लेने में तकलीफ नहीं होगी। आपकी मदद के लिए हम खुद बैंक में कह देंगे, तो आपको लाेन मिल जाएगा। उन्होंने हमारे पसंदीदा प्लॉट का खसरा नंबर 788 बताया। इस प्लॉट का लैंड यूज पता किया तो यह कृषि भूमि ही निकली। यानी बिना लैंड यूज बदले ही आवासीय भूखंड बेचे जा रहे हैं। राणा ने कहा- बागेश्वर धाम में हमारा भी योगदान यहां पहुंचने पर पता चला कि इस प्रोजेक्ट के मालिक गोलू भैया यानी सौरभ द्विवेदी हैं, लेकिन पूरा काम राणा रावत देखते हैं। गोलू वही आदमी है, जिस पर पहले से जमीन घोटालों के आरोप लगे हुए हैं। इस बार वह परदे के पीछे से काम कर रहा है। पूरे प्राजेक्ट को राणा रावत देख रहे हैं। राणा रावत ने बातचीत में दावा किया कि हम बाबा के साथ तब से हैं, जब महाराज जी के पास 15- 20 लोग आते थे। ठठरीपुर से लोगों को जोड़ना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे पब्लिसिटी की। कथाएं शुरू कीं और आज बागेश्वर धाम आप जो देख रहे हैं उसमें हमारा भी योगदान है। कॉलोनी में अंदर आते ही क्यारी, छोटा सा गार्डन और ठीक-ठाक दिखने वाला ऑफिस बना रखा है। राणा रावत ने कहा, हमारी 5-6 साइट्स चल रही हैं। मंदिर के परिक्रमा मार्ग से 6-7 दुकानें छोड़कर हमारी पहली साइट है। कार्यालय नंबर 2 के पास में 3 साइट्स चल रही है। जहां अभी बैठे हैं वह पांचवा फेज है। इसके अलावा एक प्रोजेक्ट संन्यासी धाम मार्केट का भी चल रहा है। इसी के पीछे फेज 6 है। इस फेज के बगल में कन्या विवाह हुआ है और ठीक सामने यज्ञशाला बन रही है। यहां से 2 किमी दूर कैंसर हॉस्पिटल बन रहा है। लगभग 20 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में कॉलोनियां बना रहे हैं। कॉलोनाइजर राणा रावत से रिपोर्टर की बातचीत रिपोर्टर– जमीन की कीमतें कहां से शुरू हो रही हैं? राणा– 2500 रुपए प्रति स्क्वायर फीट से शुरू होकर 5000 रुपए प्रति स्क्वायर फीट तक हैं। मेन रोड वाली जमीन की कीमतें सबसे ज्यादा हैं। रिपोर्टर– यहां पैसा लगाने में कोई दिक्कत तो नहीं? राणा– हमारे जितने प्रोजेक्ट हैं, उसमें कोई आपको परेशान नहीं कर सकता है। हमारे प्रोजेक्ट की पूरी गारंटी है। आपके साथ कुछ होता भी है तो हम पैसा वापस करने को तैयार हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए हम बैठे ही हैं। रिपाेर्टर– क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? राणा– हम सड़क- नाली कराकर देंगे। बिजली कनेक्शन भी आसानी से मिल जाएगा। इन्होंने हमें इस प्रोजेक्ट का एक पोस्टर दिया, जिस पर ये सब लिखा था- इस फेज में इनके ऑफिस के पास 2 होटल और तीन- चार घर बन चुके हैं। पूरे प्रोजेक्ट में डामर की सड़क और लाइट के पोल भी हैं। बिना लैंड डायवर्जन बना रहे कॉलोनी हम लैंड डायवर्जन और बाकी बातें जानने के लिए अगले दिन यहां फिर आए तो हमें यहां डीलर राजकुमार कुशवाहा मिले। इनके साथ हमने पूरी साइट विजिट की।
राजकुमार ने बताया कि मेन रोड की जमीन का डायवर्जन कमर्शियल है, लेकिन अंदर वाले प्रोजेक्ट का लैंड डायवर्जन नहीं हुआ है। आप जो कहेंगे उसके अनुसार जमीन का डायवर्जन कर दिया जाएगा। आपके जमीन खरीदने के 4 महीने के भीतर काम हो जाएगा। यह बात साबित करने के लिए हमने इनसे अंदर वाले प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री भी ली। इस रजिस्ट्री से भी यह बात साबित हो गई कि जमीन अभी भी कृषि भूमि है। इस प्रोजेक्ट की साइट पर कुछ लोग टेंट लगाकर बैठे थे। ईंटों की मदद से जमीन पर प्लॉट्स का डिवाइडेशन तो कर दिया था, लेकिन न तो कोई पक्की सड़क थी और न ही लाइट के पोल लगे थे। यहां बैठा एक व्यक्ति साइट दिखाने ले गया। उसने अपना नाम सुशील पांडे बताया। सुशील ने खुद को इस जमीन का पार्टनर बताया। कॉलोनाइजर सुशील से रिपोर्टर की बातचीत रिपोर्टर– यहां क्या कीमतें हैं? सुशील– अभी 2200 रुपए हैं, लेकिन कुछ समय में और बढ़ने वाली है। रिपोर्टर– इस जमीन का लैंड यूज क्या है? सुशील– कृषि भूमि है। जब हम टेंट में पहुंचे तो वहां बैठे व्यक्ति से जमीन की रजिस्ट्री के कागज मांगे। उसने हमें रजिस्ट्री के जो कागज दिखाए, उसमें भूमि का उपयोग कृषि योग्य लिखा था। सुशील का दावा है कि खरीदने पर लैंड यूज बदल देंगे। अवैध कॉलोनियों की जानकारी है– राजनगर तहसीलदार हमने राजनगर तहसीलदार धीरज गौतम से गढ़ा गांव की अवैध कॉलोनियों के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि उनके पास भी वहां अवैध कॉलोनियों के बनने की जानकारी है। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। 2- 3 कॉलोनाइजर्स पर केस भी बनाने वाले हैं। इन लोगों के पास न तो कलेक्टर की परमिशन हैं और न ही लैंड डायवर्जन के नियम पालन किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कॉलोनी बनाने के लिए क्या नियम हैं? इसके लिए हमने रिटायर्ड एडीएम जी.पी माली से बात की। जी.पी माली ने बताया ग्रामीण इलाकों में कॉलोनी बनाने के लिए पंचायती राज अधिनियम में प्रावधान किए गए हैं। रिटायर्ड एडीएम जी.पी. माली से रिपोर्टर की बातचीत सवाल: अगर कोई बिना डायवर्जन के कॉलोनी बनाकर प्लॉट बेचना शुरू कर दे, तो क्या ये गलत है? जवाब: कृषि भूमि बेचना कोई अपराध नहीं है, लेकिन अगर उसका उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए कॉलोनी के रूप में करना है, तो ऊपर बताई गई चारों अनुमतियां अनिवार्य हैं। बिना इन प्रक्रियाओं के विकसित की गई कोई भी कॉलोनी अवैध की श्रेणी में आएगी। सवाल: अगर कोई कहे कि रजिस्ट्री के बाद डायवर्जन करवा देंगे, तो क्या वह संभव है? जवाब: यह पूरी तरह अवैध है। लोग अकसर ऐसा दावा करते हैं, लेकिन बिना पूर्व अनुमति के किया गया ऐसा कोई भी कार्य अवैध कॉलोनाइजर की श्रेणी में आता है। यह वैध कॉलोनी नहीं मानी जाएगी। सवाल: अवैध कॉलोनी निर्माण पर किस तरह की कार्रवाई का प्रावधान है? जवाब: सरकार ने इसके लिए अवैध कॉलोनी अधिनियम बनाया है। इसमें कॉलोनाइजर के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है। पुलिस और नगर निगम या ग्राम पंचायत द्वारा जांच के बाद चालान पेश किया जाता है। इसमें कानूनी सजा, जेल और अर्थदंड (जुर्माना) दोनों का प्रावधान है।


