अयोध्या मंदिर की तर्ज पर बाड़मेर शहर के रातानाडा में नवनिर्मित मंदिर में भगवान राम विराजे। प्राण-प्रतिष्ठा में विधि-विधान के साथ साधु संतों के सानिध्य में धूमधाम से संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और 56 भोग सहित विशेष अनुष्ठानों के साथ भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण और प्राचीर सिंदूर वाले हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित की गई। इस दौरान चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल, भाजपा युवा नेता दीपक कड़वासरा,भाजपा जिलाध्यक्ष अनंत राम सहित हजारों की संख्या में राम भक्त मौजूद रहे। पूरा शहर भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। जहां भक्तों ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ भाग लिया। राम दरबार की मूर्तियां लगाई दरअसल, जिले का पहला राम मंदिर शहर के रातानाडा में तैयार हुआ है। मंदिर में अयोध्या की तर्ज पर भगवान श्रीराम मंदिर के ऊपरी मंजिल में बने राम दरबार की मूर्तियां स्थापित की गई। मंदिर में संगमरमर की भगवान राम की 34 इंच ऊंची मूर्ति, लक्ष्मण एवं सीता की 33 इंच की मूर्तियां व हनुमान एवं गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई। महाराज ने 15 साल पहले लिया था संकल्प मंदिर निर्माण के मुख्य प्रेरक संत नागा साधु सीताराम दास महाराज ने करीब 15 वर्ष पहले उन्होंने बाड़मेर में एक ऐसा भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया था जो सनातन परंपरा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बने। लेकिन उनका देवलोकगमन हो गया। जिसके बाद उनके शिष्य सियाराम दास महाराज ने गुरु के इस अधूरे सपने को अपनी साधना बना लिया। बाड़मेर वासियों तथा भक्तों के सहयोग से इस सपने साकार किया। सियाराम दास महाराज ने कहा की यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है बल्कि गुरु-शिष्य की अटूट श्रद्धा, जनसहयोग और राम भक्ति का जीवंत प्रतीक है। बाड़मेर शहरवासियों के बिना यह सपना पूरा नहीं होता। आज प्राण-प्रतिष्ठा के साथ यह मंदिर सभी के लिए आस्था का केंद्र बनेगा। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान शोभायात्रा, हवन, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण जैसे कई धार्मिक कार्यक्रम हुए।


