बाड़मेर में किसान का बेटा बना असिस्टेंट प्रोफेसर:आरपीएससी के एग्जाम में महिपाल को मिलीं 23वीं रैंक, बोले- अब यूपीएससी हैं टारगेट

आरपीएससी ने सोमवार की रात सहायक आचार्य(असिस्टेंट प्रोफेसर) हिंदी का रिजल्ट घोषित किया। इसमें बाड़मेर निवासी एक किसान के बेटे ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। जिसके बाद गांव और परिवार में खुशी मनाई गई। दरअसल, आरपीएससी ने बीती रात सहायक आचार्य हिंदी का रिजल्ट घोषित किया। इसमें बाड़मेर जिले के शिव भीयाड़ निवासी महिपाल दान की राजस्थान में 23 वीं रैक आई। महिपालदान का कहना है कि मेरा सपना UPSC क्रेक करने का है। इसको लेकर मेरे प्रयास जारी है। यहां तक पहुंचने में काफी परेशानी आई, लेकिन मेरे परिवार के सपोर्ट से सफलता मिली। बता दें कि राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से 2022 में सहायक आचार्य की भर्ती निकाली गई थी। 7 जनवरी को जीके और 17 मार्च को हिंदी के एग्जाम होने के बाद 24 अक्टूबर को इंटरव्यू हुए। सोमवार रात को ही सहायक आचार्य हिंदी का रिजल्ट घोषित किया गया था। चयनित महिपाल दान ने बताया- प्रारंभिक शिक्षा 10वीं तक मेरे गांव भीयाड़ में मातेश्वरी स्कूल से हुई है। साल 2016 में 10वीं 91.8% आए है। सीनियर मयूर नोबल्स स्कूल से साल 2018 में साइंस से की है। 86.60 प्रतिशत नंबर हासिल किए। ग्रेजुएशन साल 2021 में हिंदी ऑनर्स में दिल्ली विश्वविद्यालय हंसराज कॉलेज से हुई है। इसमें 82 प्रतिशत मॉर्क्स मिले। साल 2023 में एमए पूरी हुई। इससे पहले मैंने एमए के प्री- टेस्ट एग्जाम में डीईयू (दिल्ली विश्वविद्यालय) में 5वीं और जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) में 6वीं रैंक लगी थी। कोविड की वजह से वहां से एमए नहीं की, फिर राजस्थान के कोटा खुला विश्वविद्यालय से एमए पूरी की। महिपालदान का कहना है- मेरे चार चाचा है। उन्होंने काफी सपोर्ट किया। सामान्य परिवार के होने के कारण फाइनेंशियल दिक्कतें आई। जेआरएफ में स्कॉलरशिप मिलती है। अभी तक मैंने यूपीएससी का एग्जाम नहीं दिया है। तैयारी कर रहा हूं। जेआरएफ पहले प्रयास में किया टॉप
महिपाल दान का कहना है- मैं फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी में पीएचईडी कर रहा हूं। मेरा शोध विषय है गुरूदेव नानक और संत जांभोजी के काव्यों का तुलनात्मक अध्ययन है। प्री-टेस्ट में ऑल इंडिया 10वीं रैक थी। 2021 में मैंने जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) पहले प्रयास में 99.99 प्रतिशत के साथ क्लियर किया। साल 2023 में भर्ती आई है, अब सहायक हिंदी प्रोफेसर बन गया हूं। महिपाल के पिता किसान, पांच बहनों का इकलौता भाई
महिपाल के पिता डूंगर दान किसान है। साथ ही बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का भी काम है। पांच छोटी बहनें है। दो बड़ी बहनें फाइनल ईयर में पढ़ रही है। वहीं छोटी बहन कुमकुम चौथी क्लास में है। महिपाल का कहना है कि डीईयू में चयन होने के बाद वहां पर डिबेट सोसाइटी का वाइस प्रेसिडेंट रहा। अभी बहुत से इवेंट में जाता हूं। कॉलेज में बेस्ट डिबेट ऑफ ईयर भी मिले हुए है।

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