बाड़मेर में ढाई घंटे में 500 होलिका दहन:नवविवाहित दूल्हा-दुल्हन ने की पूजा-अर्चना; महिलाओं ने लगाया एक-दूसरे को गुलाल

बाड़मेर में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक होलिका दहन किया जा रहा है। श्रेष्ठ मुहूर्त सोमवार रात 9 बजे तक का है। इससे पहले गली-गली में रंग बिरंगे रंगों से युवतियों और बच्चियों ने रंगोली बनाई। अंधेरा होने के साथ होलिका का महिलाओं और युवतियां ने पूजन किया। नवविवाहित जोड़ों ने एक साथ होलिका दहन की पूजा की। वहीं माहेश्वरी चौक में महिलाओं और युवतियों ने जमकर डांस किया। एक दूसरे को गुलाल भी लगाया। प्रदोष काल में शाम 6:36 बजे श्रेष्ठ मुहूर्त शुरू हुआ। रात 9 बजे तक होलिका दहन किया गया। बाड़मेर शहर और आसपास के इलाकों में 500 से ज्यादा होली बनाई गई है। इन सभी होलिका दहन ढाई घंटे में किया गया। दरअसल, होलिका दहन और धुलंडी पर्व को लेकर कंफूयजन बना हुआ है। लेकिन बाड़मेर में सोमवार को होली पर्व मनाया जाएगा। सोमवार को शाम को 5:56 बजे पूर्णिमा शुरू हुई। यह अगले दिन यानी 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। तस्वीरों में देखें होलिका दहन सोमवार को दोपहर बाद से युवाओं व महिलाओं द्वारा गली-गली होली बनाई गई। शाम को शुभ मुहूर्त पर माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच प्रकार के अनाज में गेहूं की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखकर पूजा अर्चना की गई। इसके बाद होलिका दहन किया गया। लोगों ने प्रसाद का वितरण भी किया। दहन के बाद लगाई परिक्रमा होलिका दहन के शुभ मुहूर्त का समय होते ही महिलाएं गीत-गाती हुई विभिन्न स्थानों पर बनाई गई होलिका के पास गई। यहां पर विधि-विधान अनुसार होलिका पूजन किया। इसके बाद मंगल की कामना करते हुए होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के दौरान लोग होलिका की परिक्रमा करते हुए भी दिखाई दिए। साथ ही खुशहाली की कामना की। युवतियां और महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया। फिर डीजे और ढोल की धुन पर जमकर डांस किया। नवविवाहित दूल्हा-दूल्हे ने पहले पूजा अर्चना की। फिर वे भी परिवार के साथ डांस करते नजर आए।

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