बाड़मेर जिले में सरकारी अस्पतालों के लिए दवा खरीद में बड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जेनरिक दवाइयों का स्टॉक उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ब्लॉक स्तर पर दवाइयों की खरीद की गई, लेकिन इसमें मनमर्जी से दरें तय कर दी गईं। जिस एबीडी-प्लस सिरप की MRP करीब 57 रुपए है, उसे 78 रुपए में खरीदा गया, जबकि यही दवा बाजार में 12 से 18 रुपए तक में उपलब्ध बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद सीएमएचओ ने संबंधित अधिकारियों से दस्तावेज तलब कर जांच शुरू कर दी है। मेडिकल स्टोर से 12.50 रुपए में मिली वही दवा जानकारी के अनुसार शिव ब्लॉक में साल 2025 के दौरान सरकारी सप्लाई पर्याप्त नहीं होने के कारण दवाइयों की खरीद स्थानीय स्तर पर की गई। तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. खेतसिंह की ओर से चामुंडा फार्मास्युटिकल फर्म से दवाइयों की खरीद कर पीएचसी और सीएचसी में सप्लाई कराई गई। बताया जा रहा है कि 6 जून 2025 को करीब 10 प्रकार की दवाइयों की सप्लाई पीएचसी मौखाब को दी गई थी। इनमें एबीडी-प्लस सिरप 10 एमएल की दवा शामिल है, जिसकी एमआरपी 90 रुपए दर्शाकर 78 रुपए में खरीद की गई। जबकि वास्तविकता यह है कि इस सिरप की एमआरपी करीब 57–60 रुपए बताई जा रही है। भास्कर टीम ने जांच के दौरान यही दवा एक मेडिकल स्टोर से 12.50 रुपए में खरीदकर इसकी पुष्टि की। बिल में MRP तक नहीं लिखी, मनमर्जी से तय किए रेट नियमों के अनुसार दवाइयों की खरीद के बिल में हर दवा की MRP दर्ज करना जरूरी होता है, लेकिन संबंधित बिल में MRP के स्थान पर 0 लिखा हुआ बताया जा रहा है। इसके बावजूद दवाओं के रेट मनमर्जी से तय कर खरीद की गई। इसी आधार पर अब पूरे मामले में दवा खरीद प्रक्रिया और बिलिंग की जांच की जा रही है। शिव ब्लॉक की 6 पीएचसी को दी गई सप्लाई तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ ने बताया कि उनके कार्यकाल में 2025 में दवाइयों की खरीद की गई थी, हालांकि उन्हें अभी सटीक दरें याद नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उस समय शिव ब्लॉक की 6 पीएचसी को दवाइयों की सप्लाई दी गई थी। फिलहाल वे अब गूंगा क्षेत्र में कार्यरत हैं। सीएमएचओ बोले- डॉक्यूमेंट मंगवाकर जांच कर रहे सीएमएचओ विष्णुराम विश्नोई ने बताया कि ब्लॉक और पीएमओ स्तर पर दवा खरीद का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों से खरीद के सभी दस्तावेज मंगवाए गए हैं और पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। धोरीमन्ना में भी सामने आया दवा खरीद घोटाले का मामला इससे पहले धोरीमन्ना पीएमओ स्तर पर भी दवा खरीद में गड़बड़ी का मामला सामने आ चुका है। आरोप है कि संबंधित फर्म के साथ सांठगांठ कर बिलों में हेरफेर की गई। खुलासे के बाद पुराने बिलों को फर्जी बताकर नए बिल तैयार किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि 10.93 रुपए में मिलने वाले एंटासिड को 75 रुपए में खरीदा गया। इस मामले में भी विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। दो जिलों में कई सालों से सप्लाई दे रही एक ही फर्म बताया जा रहा है कि चामुंडा फार्मास्युटिकल फर्म लंबे समय से बाड़मेर और बालोतरा जिले के कई पीएचसी, सीएचसी और उप जिला अस्पतालों को दवाइयों की सप्लाई कर रही है। आरोप है कि कई जगह मनमर्जी से दरें तय कर दवाइयों की खरीद की गई, जिससे सरकारी खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।


