होलिका दहन और धुलंडी पर्व को लेकर कंफूयजन बना हुआ है। लेकिन बाड़मेर में सोमवार को होली पर्व मनाया जाएगा। सोमवार को शाम को 5:56 बजे पूर्णिमा शुरू होगी। यह अगले दिन 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। होलिका दहन 2 मार्च (सोमवार) को प्रदोष काल में सांय 6:36 बजे से रात 9 बजे तक श्रेष्ठ है। होली से एक दिन पहले रविवार को दिनभर बाजार में रौनक रही। जगह-जगह चंग की थाप पर होली गीत सुनाई देने लगे है। बाजार में रंग-गुलाल की दुकानों पर रंग व पिचकारी सजी हुई है। ज्योतिषी पं. सुनील जोशी ने बताया- निर्णय सागर पंचांग के अनुसार 2 मार्च सायं 5.56 बजे पूर्णिमा शुरू होगी, जो अगले दिन 3 मार्च को सांय 5.08 बजे तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन भी 2 मार्च को प्रदोष काल में सांय 6.36 बजे से रात 9.00 बजे तक श्रेष्ठ हैं। पं. सुनील जोशी ने बताया- भद्रा के सम्बन्ध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथकाल (रात) के बाद तक रहे, प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं होने से प्रदोष वेला में होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है। धुलंडी के दिन पड़ने वाला यह खग्रास-ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में ग्रस्तोदित रूप में दृश्य होगा। वहीं ये ग्रहण बाड़मेर-जैसलमेर सहित पश्चिमी गुजरात में मांद्य रूप में दृश्य होने से इन क्षेत्रों में सूतक नियम नहीं लगने से 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। बाड़मेर-जैसलमेर जिले में नहीं रहेगा असर ज्योतिषी पं. सुनील जोशी ने बताया- ग्रहण का सूतक 3 मार्च प्रातः 6.20 से सायं 6.47 बजे तक रहेगा। चंद्रग्रहण का विरल छाया में प्रभाव दोपहर 2.14 बजे से शुरू होकर, ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3.20 बजे, मोक्ष सांय 6.47 बजे होगा। लेकिन यह ग्रहण बाड़मेर, जैसलमेर मध्य एवं पश्चिमी गुजरात में मांद्य रूप में दृश्य होगा। अतः इन क्षेत्रों में ग्रहण सम्बन्धित वेध, सूतक, स्नान, दान, पुण्य, कर्म, यम, नियम आदि लागू नहीं होंगे।


