बारां के राजकीय मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी से 200 एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कॉलेज में स्वीकृत 85 फैकल्टी पदों में से 58 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों की पढ़ाई मात्र 27 शिक्षकों के भरोसे चल रही है, जिसके कारण कुछ विषयों की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से करानी पड़ रही है। सीनियर रेजिडेंट (एसआर) की स्थिति भी चिंताजनक है। स्वीकृत 40 एसआर पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 6 ही कार्यरत हैं। हाल ही में हुई काउंसलिंग में 13 एसआर आवंटित किए गए हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। पिछली काउंसलिंग में भी कई पद खाली रह गए थे। शिक्षण संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कॉलेज की लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, कैडेवर की भारी कमी है; 100 छात्रों पर केवल एक कैडेवर होने से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर सीधा असर पड़ रहा है। फिजिकल एक्टिविटी के लिए खेल मैदान और खेल सामग्री का भी अभाव है। अस्पताल आने-जाने के लिए बस जैसी परिवहन सुविधा न होने से छात्रों को परेशानी होती है। मानसिक स्वास्थ्य, लीडरशिप और टीमवर्क विकसित करने के लिए आयोजित की जाने वाली गतिविधियां भी प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही हैं। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के महत्वपूर्ण बेसिक सब्जेक्ट्स जैसे माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और फार्माकोलॉजी में भी सीमित फैकल्टी उपलब्ध है। इन विषयों में कुल मिलाकर केवल 7-8 शिक्षक ही कार्यरत हैं। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सीपी मीणा ने बताया कि फैकल्टी और एसआर की भर्ती के लिए राजमेस स्तर पर आवेदन प्रक्रिया जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही करीब 10 एसआर कॉलेज में कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। खेल मैदान और सामग्री के लिए संबंधित एजेंसियों को पत्र भेजे गए हैं, और योग, स्पोर्ट्स व अन्य गतिविधियां समय-समय पर आयोजित की जा रही हैं।


