बालाघाट जिले के विकास कार्यों और जन समस्याओं को लेकर कलेक्टर मृणाल मीणा ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री (SE) और वैनगंगा संभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) का दो दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। वहीं, शिकायतों पर ध्यान न देने वाले एक अन्य अधिकारी का भी एक दिन का वेतन काटा जाएगा। लापरवाही पर अधिकारियों को नोटिस बैठक के दौरान कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा की। काम में ढिलाई और बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित पाए जाने पर उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक (DPC) को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी को 500 दिनों से अधिक समय से रुकी 65 शिकायतों को तुरंत निपटाने की चेतावनी दी। जमीनी समस्याओं के जल्द समाधान पर जोर कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देशित किया कि वन अधिकार पट्टों के आवेदनों और वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने ‘संकल्प से समाधान’ अभियान के तहत लग रहे शिविरों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के आवेदनों का मौके पर ही निराकरण होना चाहिए। नगर पालिका अधिकारियों को भी स्वामित्व योजना के कामों में देरी न करने की हिदायत दी गई। निरीक्षण और डिजिटल कामकाज करने के निर्देश जिले की स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर्स और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को होटलों व रेस्टोरेंटों का नियमित निरीक्षण करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी फाइलें ‘एमपी ई-ऑफिस’ के माध्यम से ही निपटाएं; जो अधिकारी डिजिटल माध्यम का उपयोग नहीं करेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।


