बालाघाट जिला प्रशासन ने मानसून से पहले 200 स्कूलों का कायाकल्प करने का काम शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत बिरसा और बैहर क्षेत्र के 20 स्कूलों से हुई है, जहां प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत मरम्मत कार्य जारी है। जिले के कई आदिवासी अंचलों में स्कूलों की स्थिति जर्जर थी। बरसात के दौरान छतों से पानी टपकना, प्लास्टर गिरना और कक्षाओं में बाल्टियां रखने जैसी समस्याएं आम थीं। बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया था। कई स्कूलों में खिड़की-दरवाजे टूटे हुए थे, जिससे पशु भी अंदर आ जाते थे। गर्मी में टीन की छत के नीचे पढ़ाई करना शिक्षकों और छात्रों के लिए चुनौती थी। इसके अतिरिक्त, दीवारों में दरारें और शौचालय व पेयजल की उचित व्यवस्था का अभाव भी एक बड़ी समस्या थी। हर स्कूल पर खर्च होंगे सवा लाख कलेक्टर मृणाल मीणा ने बताया कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत बिरसा के 10 स्कूलों के लिए 12 लाख 50 हजार रुपए और बैहर के 10 स्कूलों के लिए 12 लाख 46 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक स्कूल पर लगभग सवा लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इन निधियों का उपयोग छतों, दीवारों, फर्श और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए किया जाएगा, ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। कलेक्टर ने यह भी बताया कि शेष स्कूलों का कायाकल्प अन्य योजनाओं और स्कूल मद से किया जाएगा। यह मरम्मत कार्य मुख्य रूप से प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में किया जा रहा है। कार्य की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी सीईओ और एसडीएम को सौंपी गई है।


