बाल अधिकार आयोग में अध्यक्ष-सदस्य नहीं, सरकार को नोटिस:1 साल से ज्यादा समय से खाली पड़े पद; हाईकोर्ट ने 23 फरवरी तक मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था ‘राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (RSCPCR) में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने पर सख्त ऐतराज जताया है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका की शुरुआती सुनवाई में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आयोग की ‘नींद’ पर कोर्ट की खरी-खरी
जोधपुर हाईकोर्ट में जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने ‘जुवेनाइल जस्टिस एडवोकेट्स एसोसिएशन’ की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को चेताया कि पिछले एक साल से ज्यादा समय से आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। नतीजा? यह महत्वपूर्ण संस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है, और बच्चों के अधिकारों की निगरानी का काम रुक गया है। महत्वपूर्ण कानूनों के क्रियान्वयन पर संकट
याचिका में दलील दी गई कि आयोग के निष्क्रिय होने से राज्य में बच्चों से जुड़े कई क्रिटिकल कानूनों का क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इनमें शामिल हैं: पॉक्सो एक्ट: बच्चों को यौन अपराधों से बचाने का मजबूत कवच। आरटीई एक्ट: हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का हक। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट: बच्चों की देखभाल और संरक्षण के कानूनी ढांचे। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट: बच्चों की देखभाल और संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधान। वकील ने तर्क दिया कि आयोग की अनुपस्थिति में राज्य के संवेदनशील और कमजोर वर्ग के बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा में एक ‘बड़ा शून्य’ उत्पन्न हो गया है। आयोग का मुख्य कार्य इन कानूनों के तहत बच्चों को मिलने वाले लाभों और सुरक्षा की निगरानी करना है, लेकिन नेतृत्व के अभाव में यह संस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है। सरकार को 23 फरवरी तक देनी होगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए 17 फरवरी को आदेश जारी किए। अदालत की ओर से जारी नोटिस को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण खंडेलवाल ने स्वीकार किया। कोर्ट ने इस मामले में बाल अधिकार विभाग के मंत्री और मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव बाल अधिकार विभाग के आयुक्त से जवाब मांगा है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे 23 फरवरी तक इस संबंध में एक डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इतने महत्वपूर्ण पदों को लंबे समय तक खाली रखना बच्चों के अधिकारों के प्रति लापरवाही को दिखाता है। — ये खबर भी पढ़ें CJI बोले-मेरे नाम से नाइजीरिया में बन रहीं फर्जी साइट्स:मेरी बहन और वकील को मैसेज भेजा; सीएम ने कहा-राज्य में स्पेशल साइबर कोर्ट खुलेगी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा- मेरे नाम से हर दूसरे दिन नई साइट बन जाती हैं। उसमें मेरे कई फोटोग्राफ डाल दिए जाते हैं। उन्होंने कहा- मैं आपको अपना एक छोटा सा उदाहरण दे सकता हूं। हर दूसरे दिन मेरे नाम पर एक नई साइट देखता हूं। मेरे एक-दो शुभचिंतक हैं, जो मेरे मोबाइल पर मैसेज भेज देते हैं और कहते हैं कि आपके नाम पर नई साइट बनी है। (पूरी खबर पढ़ें)

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