बाहरी धान खपाकर गुनाह कबूला, फिर भी कार्रवाई नहीं

भास्कर न्यूज| महासमुंद धान खरीदी का सीजन खत्म होते ही अब केंद्रों से गड़बड़ी के मामले बाहर आने लगे हैं। महासमुंद जिले के बीरकोनी ग्रामीण सेवा सहकारी समिति में बाहरन धान (बाहर से लाया गया धान) को सरकारी कोटे में खपाने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। आरोप है कि केंद्र प्रभारी ने एक महिला किसान के नाम का सहारा लेकर नियमों को ताक पर रखकर अवैध धान की एंट्री की। मिली जानकारी के अनुसार, समिति (पंजीयन क्रमांक 1696) के प्रबंधक और खरीदी प्रभारी मोहन सिंह जांगड़े ने वर्ष 2025-26 की खरीदी के दौरान 18.46 क्विंटल (46 बोरा) अतिरिक्त धान की फर्जी एंट्री की। यह धान फगनी बाई निषाद के नाम पर दर्ज दिखाया गया था, जबकि वास्तविकता में यह धान बाहर का था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब समिति स्तर पर जांच हुई और पंचनामा तैयार किया गया, तो प्रबंधक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। प्रबंधक मोहन सिंह जांगड़े ने लिखित में माना कि 18.46 क्विंटल धान बाहर से लिया गया है। उन्होंने पंचनामे में कहा कि वह इस धान की भरपाई करेंगे। भविष्य में ऐसी गलती होने पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार रहेंगे। शासन की मंशा किसानों को लाभ पहुंचाने की है, लेकिन बीरकोनी जैसे मामले बताते हैं कि बिचौलिए और जिम्मेदार अधिकारी मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषियों को जेल भेजता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। मामला दबाने की कोशिश, उठ रहे सवाल: चर्चा है कि लिखित कबूलनामे के बावजूद अब तक प्रशासन ने कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है, जिससे मामले को रफा-दफा करने की बू आ रही है। यह मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब प्रबंधक ने खुद फर्जीवाड़ा स्वीकार कर लिया है, तो अब तक एफआईआर या निलंबन जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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