बिजनेसमैन के बेटे को किडनैप करने की कोशिश की थी:कोचिंग के बाहर से कार में पटककर ले जाने वाले थे; अब कोर्ट ने दोषियों को दी सजा

जोधपुर के सरदारपुरा थाना क्षेत्र में 13 साल पहले 7 साल के बच्चे के किडनैप की कोशिश के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2, प्रवीण चौधरी ने मंगलवार को तीन आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस कृत्य को गंभीर मानते हुए दोषियों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोचिंग के बाहर से किडनैप करने आए थे आरोपी मामला 20 अक्टूबर 2013 का है। जब बड़े कारोबारी के 7 साल के बच्चे को नेहरू पार्क से किडनैप की कोशिश हुई थी। बच्चा अपने घर से यहां कोच के पास शतरंज की प्रैक्टिस करने गया था। दोपहर करीब 1:15 बजे, जब बच्चा कोचिंग के अंदर था। तब एक व्यक्ति वहां पहुंचा और कोच से झूठ बोला कि बच्चे को उसकी मां बाहर बुला रही हैं। कोच ने उस व्यक्ति को बच्चे की प्रैक्टिस पूरी होने तक बाहर रुकने को कहा। बच्चा अपनी क्लास खत्म कर बाहर आया। तब बाहर एक सफेद रंग की बिना नंबर की गाड़ी खड़ी थी। आरोपियों ने उसे बातों में उलझाने की कोशिश की और उसे जबरन कार के अंदर धकेलने की कोशिश की। बच्चे के “भैया-भैया” चिल्लाने की आवाज सुनकर कोच और अन्य लोग बाहर आए तो आरोपी घबराकर गाड़ी सहित मौके से फरार हो गए। मामले में सरदारपुरा पुलिस ने तीन आरोपियों- करण चौधरी, विनोद कुमार और बक्ताराम को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए थे, जो इस मामले में अहम सबूत बने। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया है। घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने बच्चे और उसके टीचर की गवाही पेश की, जिन्होंने घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दिया। कोर्ट ने माना कि चश्मदीद गवाहों के बयानों में कोई ठोस विरोधाभास नहीं है और आरोपियों की पहचान स्थापित हो चुकी है। कोर्ट की टिप्पणी: “षड्यंत्र के तहत किया गया अपराध” सजा पर सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी प्रवीण चौधरी ने सख्त रुख अपनाया। दोषियों ने अपनी कम उम्र और 13 साल से चल रही अदालती प्रक्रिया का हवाला देते हुए परिवीक्षा का लाभ मांगा था लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह अपराध पूरी तैयारी और षड्यंत्र के तहत किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा: यदि बच्चा सजग नहीं होता, तो इस कृत्य के परिणाम और भी भयानक हो सकते थे। ऐसे अपराधों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाता है और अपराधों की पुनरावृत्ति की संभावना बनी रहती है। कोर्ट ने तीनों दोषियों- पाल रोड धायलों की ढाणी निवासी करण चौधरी (36) पुत्र प्रेमाराम, नागौर के चितावा में कांकरिया इंडाली निवासी विनोद कुमार (40) और धायलों की ढाणी निवासी बक्ताराम (34) को अपहरण के प्रयास का दोषी पाया। इन तीनों को 3-3 साल साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर इन्हें एक-एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद तीनों ही दोषियों को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

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