बिना गुनाह साबित हुए सजा दे रही है सरकार:सिंहदेव:चैतन्य बघेल, कवासी लखमा, हेमंत सोरेन, सभी के साथ यही हुआ

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चैतन्य करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हुए। चैतन्य बघेल की रिहाई को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ईडी का इस्तेमाल कर लोगों को दोष साबित होने से पहले ही सजा दी जा रही है, जो कानून के दायरे के विपरीत है। सिंहदेव ने कहा कि कानून का मूल सिद्धांत यह है कि जब तक अपराध साबित न हो, तब तक व्यक्ति को बेगुनाह माना जाता है, लेकिन यहां जांच चल रही है और सजा पहले दी जा रही है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि 2014 के बाद से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री, बिट्टू और देवेंद्र यादव जैसे नेताओं के साथ भी यही हुआ है। उन्होंने इसे देश में एक गलत परंपरा की शुरुआत बताया। क्या कहा टीएस सिंहदेव ने ईडी का उपयोग करके लोगों को दोष साबित होने से पहले ही सजा देने की प्रक्रिया गलत है, कानुन के दायरे के विपरीत है,हम ये मानते हैं कि हर व्यक्ति बेगुनाह है, जब तक वो गुनाहगार साबित नहीं होता है,अभी जांच चल रही है और आपने सजा भी दे दी,जो गलती करते हैं, उनको सजा होनी चाहिए, जब से 2014 से केंद्र में सरकार आई है, इसका उपयोग कहीं ज्यादा बढ़ गया है, कवासी लखमा, हेमंत सोरेन,चाहे दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्मंत्री के साथ हुआ हो, बिट्टू भी उसमें ही आते हैं, देवेंद्र यादव को भी जेल में बंद कर दिया गया, ये बिल्कुल गलत परंपरा शुरु हो रही है हमारे देश में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में हुई थी गिरफ्तारी चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद सितंबर में छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी की, जब वे पहले से ही जेल में थे। जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब एक हजार करोड़ रुपए के लेन-देन को संभाला। वहीं एसीबी का दावा है कि उन्हें हिस्सेदारी के तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए मिले और घोटाले की कुल रकम 3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। बेटे को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं होता। चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद कांग्रेस समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *