रियल एस्टेट सेक्टर को अक्सर केवल मुनाफे के नजरिए से देखा जाता है, लेकिन सृष्टी इन्फ्राबिल्ड की युवा लीडर अदिति चटर्जी इसे विजन, धैर्य और स्ट्रेटेजिक लीडरशिप के साथ देखने की बात करती हैं। उनका मानना है कि आज की जेन-जी पीढ़ी जितनी अपफ्रंट है, उतना ही विजनरी होना भी जरूरी है। IIM इंदौर के लीडरशिप प्रोग्राम ने उनकी सोच को और अधिक संरचित, सस्टेनेबल और टेक्नोलॉजी ड्रिवन बनाया है। बिलासपुर की अदिति चटर्जी कहती हैं कि रियल एस्टेट एक बूमिंग सेक्टर जरूर है, लेकिन यह कहना कि इसमें सिर्फ पैसा ही पैसा है, सही नहीं है। इस फील्ड में ग्राउंड लेवल पर कड़ी मेहनत, साइट विजिट्स, टीम कोऑर्डिनेशन और लगातार मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। एक लीडर के रूप में उनकी जिम्मेदारी सिर्फ प्रोजेक्ट लॉन्च तक सीमित नहीं, बल्कि प्लानिंग से लेकर डिलीवरी तक एक्टिव इन्वॉल्वमेंट की है। उनका मानना है कि Gen-Z की क्लियर और डायरेक्ट अप्रोच तभी काम करती है जब उसके साथ लॉन्ग टर्म विजन और पेशेंस जुड़ा हो। बिजनेस की रियल ग्रोथ के लिए सस्टेनेबिलिटी जरूरी है, और सस्टेनेबिलिटी के लिए कंसिस्टेंसी और पेशेंस सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। टेक्नोलॉजी को लेकर अदिति की सोच काफी पॉजिटिव है। वे मानती हैं कि AI और नई डिजिटल टेक्नोलॉजी रियल एस्टेट में भी गेम चेंजर बन सकती हैं। अगर आप जानते हैं कि इसे कैसे यूज करना है, तो यह बिजनेस को अपलिफ्ट करने का स्ट्रॉन्ग टूल बन जाती है। खासकर छोटे शहरों में फिलहाल AI बेहतर प्रपोजल बनाने, प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन तैयार करने और वर्क प्रोसेस को ज्यादा टेक-फ्रेंडली बनाने में मदद कर रही है। IIM इंदौर के लीडरशिप प्रोग्राम को वे अपने करियर का एक इम्पॉर्टेंट टर्निंग पॉइंट मानती हैं। उनका कहना है कि जब आपको ऐसे प्लेटफॉर्म पर पता चलता है कि दुनिया में कितने नए बिजनेस मॉडल और अपॉर्च्युनिटीज मौजूद हैं, तब लीडरशिप मेंटरशिप की असली वैल्यू समझ आती है। यह सिर्फ नॉलेज नहीं, बल्कि माइंडसेट अपग्रेड है। अदिति का यह भी मानना है कि हर बिजनेस में एक सोशल कॉज होना चाहिए। अगर अभी तक क्लियर नहीं है, तो उसे फाइंड आउट करना चाहिए। उनकी कंपनी का फोकस लग्जरी को ज्यादा अफोर्डेबल बनाना है, ताकि बेहतर लाइफस्टाइल सिर्फ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे।


