बिलासपुर में 15वें-वित्त की राशि में 24.70 लाख का घोटाला:याचिका लगाने वाले सचिव को बनाया आरोपी, वकील बोले-हाईकोर्ट को किया गुमराह, अफसरों की भूमिका पर सवाल

बिलासपुर में जनपद पंचायत बिल्हा के ग्राम पंचायत ढेका में पूर्व सरपंच ने लाखों रुपए हेराफेरी करने वाले पूर्व सरपंच समेत चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। अफसरों ने जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने का दावा किया है। लेकिन, मामले को जिस सचिव ने उजागर किया उसको भी आरोपी बना दिया है। जनपद पंचायत और पुलिस की इस कार्रवाई पर सचिव के वकील ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में केस लगाने के बाद गुमराह करने और सचिव पर दबाव बनाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। सचिव की शिकायत को दबाए बैठी रही पुलिस
दरअसल, पंचायत के पूर्व सचिव सचिन कुमार कौशिक ने आरोप लगाया था कि उसकी जानकारी के बिना फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर कर कई मद के पैसे किश्तों में निकाली गई। साथ ही बिना बिल-वाउचर के निर्माण कार्य कराया गया। सचिव ने पूर्व सरपंच दिनेश मौर्य पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए शिकायत कर FIR दर्ज करने की मांग की थी, जिस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सचिव का आरोप है कि उसकी शिकायत को पुलिस पांच माह तक दबाकर बैठ गई थी। जानकारी होने पर गड़बड़ियों को किया उजागर
पंचायत के पूर्व सचिव सचिन कुमार कौशिक ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत कर बताया कि, चुनाव से पहले और बाद में उसने सरपंच से जानकारी मांगी थी। जिस पर वो टालमटोल करता रहा। उसका आरोप है कि, 22 जनवरी 2022 से वो सचिव पद पर कार्यरत है। लेकिन, सरपंच दिनेश मौर्य और उसके मित्र ने उसे पंचायत के अभिलेखों को देखने तक नहीं दिया। सरपंच ने अपना मोबाइल नंबर किया एड
15वें वित्त आयोग की राशि का आहरण उसके फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए किया गया है। उसने बताया कि, उसकी डिजिटल आईडी को छिनकर ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उसके मोबाइल नंबर को बदलकर दिनेश मौर्य ने अपने मोबाइल नंबर पर पंजीकृत करा लिया। जिससे ऑनलाइन डिजिटल हस्ताक्षर कर वो राशि का आहरण कर सके। फर्जी हस्ताक्षर कर पोर्टल को किया अनरजिस्टर्ड
सचिव का यह भी आरोप है कि, 19 जून 2024 को पूर्व सरपंच दिनेश मौर्य ने उसकी डिजिटल आईडी ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से अनरजिस्टर्ड करने के लिए उसका फर्जी हस्ताक्षर कर आवेदन पत्र जनपद पंचायत कार्यालय में जमा किया था। इसकी जानकारी उसे तब हुई, जब उसने 13 मई 2025 को जानकारी जुटाई। इसी दौरान उसे पता चला कि उसके डिजिटल आईडी को पूर्व सरपंच अपने मोबाइल के जरिए ऑपरेट कर रहा था। ताकि, रकम की हेराफेरी की जानकारी उसे न हो सके। फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक में लगाया चेक
सचिव का आरोप है कि, विभिन्न मदों और निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए पूर्व सरपंच ने चेक में उसका फर्जी हस्ताक्षर बैंक में लगाया है। जिससे लाखों रुपए का भुगतान भी करा लिया। वहीं, कई भुगतान बिना बिल, वाउचर, सत्यापन के बिना ही करा लिया। सचिव ने आरोप लगाया है कि, पंचायत में करोड़ों रुपए के कार्यों के नाम पर इस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है। जिसकी जांच कर दोषी पूर्व सरपंच से रिकवरी करने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद FIR, याचिकाकर्ता को बनाया आरोपी
इस मामले में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने जांच टीम गठित की। जांच टीम में शामिल सदस्यों ने इस मामले में सरपंच और एक अन्य सचिव भानू विश्वकर्मा से मिलीभगत कर पहले पूर्व सचिव सचिन कौशिक पर केस वापस लेने का दबाव बनाया। फिर प्रारंभिक जांच के बाद पूर्व सचिव सचिन कौशिक को निलंबित कर दिया गया। जबकि, सचिन ने अपने बचाव में सबूत दिखाए और बताया कि उसके फर्जी हस्ताक्षर से यह पूरी गड़बड़ी की गई है। लेकिन, उसका पक्ष नहीं सुना गया। इससे परेशान होकर पूर्व सचिव सचिन ने वकील रमेश नायक के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस मामले में हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद अब जनपद पंचायत के अकाउंटेंट ने तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर पूर्व सरपंच दिनेश मौर्य, सचिव भानू विश्वकर्मा, कोटवार कमल कश्यप के साथ ही याचिकाकर्ता पूर्व सचिव सचिन कौशिक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। जिले के सभी पंचायतों में चल रहा है ऐसा घोटाला
बता दें कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों में इस तरह की गड़बड़ियां की गई है। दरअसल, जिला पंचायत ने सभी ग्राम पंचायतों के सचिव को डिजिटल आईडी ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर काम करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन, ज्यादातर सचिव ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर खुद काम नहीं करते। उनकी जगह दूसरे सचिव उनके आईडी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए भी किया जाता है ताकि, पंचायत के काम को सेंट्रलाइज किया जा सके। इस काम को अफसरों के खास और चहेते सचिव ही करते हैं। जिले के हर जनपद पंचायत में एक सचिव 10 से 15 पंचायत सचिव के आईडी को ऑपरेट कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, पंचायत के निर्माण कार्य में उन्हें कमीशन मिल सके। इस अवैध काम की जानकारी जनपद और जिला पंचायत के अफसरों की मिलीभगत से चल रही है। बकायदा अफसरों ने क्षेत्रवार पंचायत सचिवों को आईडी बांट दिया है। वहीं, जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस तरह की शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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