कोटा में सात फरवरी की रात को इंद्र विहार इलाके में तीन मंजिला रेस्टोरेंट ढ़ह जाने से एक कोचिंग स्टूडेंट की भी मौत हुई थी। बच्चे की मौत ने तो उसके पिता अभिजीत को तोड ही दिया, इसी हादसे में घायल अस्पताल में भर्ती उनकी पत्नी सुदिप्ता के इलाज के लिए अब उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। दो दिन पहले ही उनकी पत्नी का पैर काटना पड़ा। अब इलाज में लगने वाले पैसे भी खत्म होने लगे है। अभिजीत को कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या करें।
गौरतलब है कि कोटा में सात फरवरी को इन्द्र विहार में तीन मंजिला भवन गिर गया था। इसमें दबने से कोचिंग स्टूडेंट अनारण्य की मौत हो गई थी और उसकी मां सुदिप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थी। दोनों इस बिल्डिंग में रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए गए हुए थे। सुदिप्ता को हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था, जहां डॉक्टर्स ने बताया कि उनकी हालत बहुत गंभीर है पैर काटने की स्थित होगी। इसके बाद उन्हें तलवंडी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। हादसे की जानकारी मिलने के दूसरे दिन अभिजीत और उनकी बेटी अद्रिका कर्मकार कोटा पहुंच गए थे। आठ लाख खर्च हो चुके, अब डर सताने लगा
अभिजीत ने बताया कि सुदिप्ता की हालत अभी भी गंभीर ही बनी हुई है। हालांकि अभी वह बहुत कम बात करना शुरू की है। उनके पैर, सिर में गंभीर चोट थी। पैर को बचाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन आखिरकार पैर में इंफेक्शन होने की वजह से पैर को काटना पड़ा। दो दिन पहले ही सर्जरी हुई और पैर को काट दिया गया। उन्होंने बताया कि 16 दिन में उनके करीब आठ लाख खर्च हो चुके हैं। वे शिक्षा विभाग से रिटायर है। उन्हेांने बताया कि जो बचत के पैसे थे उससे बेटे बेटी को पढ़ा रहे थे। अब इलाज में पैसे लग गए। उन्होंने कहा कि अब इलाज के लिए पैसे खत्म होने लगे है जबकि इलाज अभी बहुत होना बाकी है। अस्पताल में कितने दिन रहना पडे़गा, आर्टिफिशियल पैर लगवाना, दवाईंयों का खर्चा सब है। इसी बात की चिंता है कि अब पत्नी का इलाज कैसे करवाए। प्रशासन की तरफ से कोई सहायता आज तक नहीं मिली है। पढ़ाई छोड़ मां की देखभाल कर रही बेटी
अद्रिका एमबीए की पढ़ाई कर रही है। अद्रिका हादसे के दूसरे दिन कोटा आ गई थी। तब से कोटा में ही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से हॉस्टल और हॉस्टल से अस्पताल यही लाइफ हो चुकी है। मां की स्थिति खराब है उनकी लगातार चिंता बनी हुई है। भाई को तो खो ही चुकी हूं, अब मां को लेकर टेंशन रहती है। इलाज के लिए प्रशासन को, यहां के नेताओं को कुछ तो मदद करनी चाहिए। कोटा में पढ़ने के लिए किसके भरोसे हमने भाई को भेजा था। आज उस परिवार को कोटा के लोगों की जरूरत है तो कोई आगे नहीं आ रहा है। अराण्य जेईई की तैयारी करने के लिए आया था, इस साल एग्जाम देता। हॉस्टल में रहने खाने के लिए मदद
अभिजीत ने बताया कि जिस हॉस्टल में बच्चा रहता था उस हॉस्टल की तरफ से उनके अभी रहने और खाने के लिए व्यवस्था की गई है। इस मामले को लेकर बच्चा जिस एलेन कोचिंग में पढ़ रहा था वहां बात की गई तो उनका कहना था कि उनकी तरफ से परिवार की मदद की जा रही है। हादसे के बाद परिवार को जो बच्चे की फीस जमा थी वह लौटा दी गई थी। इसके अलावा महिला के इलाज के लिए भी कोचिंग संस्था साथ है। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए कोचिंग की तरफ से मदद की जा रही है। अस्पताल में भी इसके बारे में जानकारी दे दी गई थी।


