बीकानेर में होली का उत्सव अब परवान पर है। दोपहर में हर्षों के चौक में हर्ष और व्यास जाति के लोगों ने जहां एक दूसरे पर पानी का वार किया, वहीं शाम को धरणीधर मैदान में फागणियां फुटबॉल का आयोजन हुआ। हर्षों के चौक में दोपहर में खेल शुरू हुआ जो शाम तक अनवरत चलता रहा। हर साल अपने विशिष्ट और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है, जिसे स्थानीय लोग पानी मार होली कहते हैं। इस परंपरा में मुख्य रूप से पुष्करणा ब्राह्मण समाज के हर्ष और व्यास समुदाय के पुरुष हिस्सा लेते हैं। शनिवार को हर्षों के चौक में फिर पांच सौ साल पुरानी परम्परा का निर्वहन किया गया। खेल के अंत में हर्ष समाज की ओर से गुलाल उछाली गई, जिसके बाद खेल खत्म हो गया। दोनों तरफ से एक दूसरे के खिलाफ जमकर पारम्परिक गीत गाए गए। क्या है यह खेल? डोलची मार होली में रंगों की जगह पानी का इस्तेमाल होता है। पुरुष एक विशेष प्रकार की पानी भरने वाली डोलची (चमड़े से बना एक तिकोना पात्र) से एक-दूसरे पर पानी फेंकते हैं, जिससे पूरा खेल पानी के साथ उत्साहपूर्ण ढंग से चलता है। एक दूसरे की कमर पर पानी से वार किया जाता है, जिससे कई बार कमर लाल हो जाती है। संस्कृति और इतिहास: यह खेल लगभग 500 साल पुरानी परंपरा मानी जाती है और इसे भाईचारे, प्रेम और मेल-मिलाप का प्रतीक बताया जाता है। पुराने समय में हर्ष और व्यास जाति के बीच विवाद के बाद इस अनूठे तरीके से मेल-जोल और दोस्ती को आगे बढ़ाने के लिए इसका आरंभ हुआ था। होली के दिन इस खेल को देखने और खेलने के लिए स्थानीय जनता काफी उत्साह के साथ जुटती है। पारंपरिक लोकगीतों के साथ यह जल-खेल बहुत मनोरंजक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अनुभव बन जाता है। फागणियां फुटबॉल में दिखा रोमांच इस बार भी फागणियां फुटबॉल धरणीधर मैदान में खेला गया। जहां वीर तारा, भगवान शिव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बनकर युवा मैदान में उतरे। बड़ी संख्या में महिलाओं का स्वांग धरकर एक दूसरे के पास पहुंचे। इस दौरान फुटबॉल के शॉट्स मारे गए। कई कलाकारों ने वर्तमान हालातों पर कमेंट भी किए। मैदान में स्वांग बनने से पहले इन कलाकारों ने जमकर शृंगार करवाया। आयोजक सीताराम कच्छावा ने बताया कि पिछले एक दशक से हो रहे इस खेल के प्रति बीकानेर के लोगों का खास लगाव है।


