बीकानेर के मूंडसर गांव में पिछले दिनों विवाह के दौरान एक परिवार ने भव्य मायरा भरा, जिसकी चर्चा अब तक जिलेभर में है। मूंडसर गांव में स्वरूपदेसर के कालूराम सियाग ने अपनी बहन के दो बेटों और एक बेटी की शादी में 51 लाख रुपए नगद और करीब 25 लाख रुपए के सोने के साथ मायरा भरा। बीकानेर और नागौर क्षेत्र में इसी तरह के मायरे भरने की चर्चा बनी रहती है। छोटे गांव में बड़ा आयोजन नापासर के पास स्थित मुंडसर गांव में 19 तारीख को धर्मपाल मुंड के परिवार में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ। धर्मपाल किसान है। इस समारोह में उनके दो बेटों और एक बेटी की शादी हुई थी। इस अवसर पर स्वरूपदेसर निवासी कालूराम सियाग अपनी बहन का मायरा भरने पहुंचे। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उन्होंने थाल में 51 लाख रुपए नकद और करीब 25 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण दिए। मायरा: परंपरा और प्रतिष्ठा का संगम राजस्थान में मायरा भरने की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। इस रस्म के तहत मामा अपनी बहन के बच्चों की शादी में अपनी सामर्थ्य के अनुसार कपड़े, गहने और नकद राशि भेंट करता है। बीकानेर अंचल में यह परंपरा कई बार भव्य रूप ले लेती है और इसे सामाजिक सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है। मुंडसर में आयोजित इस मायरे ने अपनी भव्यता के कारण विशेष ध्यान आकर्षित किया। समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मायरे की रकम सामने आते ही लोग मोबाइल कैमरों से वीडियो बनाने लगे। गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह आयोजन चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सामाजिक संदेश या बढ़ती प्रतिस्पर्धा? ग्रामीण अंचल में इस तरह के भव्य मायरे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आती हैं। एक ओर इसे भाई-बहन के प्रेम और आर्थिक सामर्थ्य के प्रदर्शन के रूप में देखा जाता है, तो वहीं दूसरी ओर सामाजिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते खर्चों को लेकर भी चर्चा होती है। फिलहाल मुंडसर का यह मायरा बीकानेर क्षेत्र में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पारंपरिक रस्म को भव्यता के नए स्तर पर पहुंचा दिया है।


