बीजेपी की रविवार को जारी सूची में प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों के रूप में उदयपुर जिले के 6 नेताओं को मौका मिला है। इसमें रवीन्द्र श्रीमाली, अर्जुन मीणा, प्रमोद सामर, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, रणधीरसिंह भींडर और अतुल चंडालिया शामिल हैं। लंबे समय बाद वल्लभनगर से विधायक रहे भींडर को फिर से मुख्यधारा में जुड़ने का मौका मिला है। उदयपुर से शहर से 4 और देहात से 2 नामों को इस लिस्ट में जगह मिली है। गुटबाजी के बीच प्रदेश बीजेपी ने उदयपुर में कटारिया और वसुंधरा गुट के नेताओं को पूरी तवज्जो दी है। पिछले 1 साल से चल रही गुटबाजी और उदयपुर में तथाकथित वीडियोकांड के बीच इन नामों की घोषणा ने कटारिया गुट को मजबूत किया है। रविन्द्र श्रीमाली और चन्द्रगुप्त सिंह चौहान दोनों पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। श्रीमाली के नगर परिषद् सभापति, यूआईटी चैयरमैन और शहर जिलाध्यक्ष जैसे पदों पर रहने से प्रोफाइल काफी मजबूत थी, ऐसे में उनका प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनना लगभग तय था। इस सूची में कटारिया गुट के नेताओं को भी पूरी तरजीह मिली है। रविन्द्र श्रीमाली, अतुल चंडालिया और चन्दगुप्त सिंह चौहान उनके करीबी नेताओं की फेहरिस्त में है। उधर, टिकट कटने के बाद लंबे समय से रेस्ट मोड़ में चल रहे पूर्व सांसद अर्जुन मीणा और पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर की संगठन में वापसी हुई है। ये दोनों नेता पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं। वहीं मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के करीबी प्रमोद सामर को भी मौका मिला है। पहले सामर भी कटारिया के करीबी लोगों में से एक थे लेकिन पिछले कुछ सालों से उन्हें कटारिया गुट के विरोधी गुट में माना जाता है। दरअसल, पिछले कई समय से उदयपुर में चल रही गुटबाजी के बीच प्रदेश टीम में इन नेताओं को जगह मिलना संगठन में दोनों गुटों के बराबर वैटेज के रूप में माना जा रहा है। अतुल चंडालिया उदयपुर शहर के जिलाध्यक्ष के प्रबल दावेदर थे, मगर संगठन ने उन्हें कई और मौका देने का भरोसा दे रखा था। अतुल चंडालिया पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के दामाद के भाई है। वही वीडियोकांड के बीच इस्तीफे की संभावित स्थिति में कटारिया गुट के इन दोनों नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी देने की भी चर्चा थी, ऐसे में इनके प्रदेश टीम में जाने से अब किसी और नाम को आगे किया जा सकता है।


