टोंक में बुजुर्ग महिला की गला काट कर हत्या और पैर काटकर चांदी के कड़े ले जाने वाले 2 आरोपियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उनके एक साथी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। 10 साल पुराने मामले में गुरुवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश महावीर महावर फैसला सुनाया। उन्होंने फैसले में लिखा- न्याय होना नहीं दिखना भी चाहिए। सबसे सुरक्षित जगह घर में बुजुर्ग महिला की हत्या हुई। उन्होंने दोनों हत्यारों पर 25-25 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। वहीं इस मामले में एक आरोपी अभी फरार चल रहा है। फैसले के बाद बुजुर्ग महिला का इकलौता बेटा बोला- आज अम्मी को न्याय मिल गया। एक आरोपी अब भी फरार मामला 26 जून 2016 का था। भूरी बेगम की हत्या के आरोप में मालपुरा थाना क्षेत्र की घाटी रेबारियों की बाड़ी निवासी सीताराम और रामनिवास उर्फ काल्यो को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीसरे आरोपी अम्बालाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं भीलवाड़ा जिले के हनुमान नगर थाना क्षेत्र के टिगड़गढ़ निवासी प्रभुलाल पुत्र रामस्वरूप फरार है। बेटा बोला- अन्य किसी की हत्या न कर पाएं भूरी बेगम के इकलौते बेटे ईद मोहम्मद कायमखानी ने बताया- कोर्ट पर उन्हें शुरू से विश्वास था कि एक दिन उनकी अम्मी (मां) के हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा मिलेगी। अब पुलिस से मांग करता हूं कि फरार आरोपी को भी जल्द गिरफ्तार कर उसे भी आजीवन कारावास की सजा दिलाए। ताकि ये हत्यारे बाहर रहकर किसी अन्य की हत्या न कर पाए। गला काटा, टखनों से पैर काट ले गए थे कड़े सरकारी वकील प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि दूनी थाने में साकिर हुसैन ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 26 जून 2016 को उसके चाचा रोशन खां के पुत्र ईद मोहम्मद का उसके पास फोन आया कि उसकी मां भूरी बेगम आज कुएं पर नहीं आई। तो वह घर जाकर उसे देखे। ऐसे में जब साकिर अपने चाचा के घर गया और चाची को आवाज दी तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। बाद में साकिर घर की दीवार फांदकर अंदर गया तो भूरी बेगम का शव लहूलुहान हालत में पड़ा था। उनका गला काटा गया था। वहीं भूरी बेगम के दोनों पैरों को टखने के पास से काटा हुआ था। उनके पैरों में पहने चांदी के कड़े गायब थे। 20 गवाह और 42 दस्तावेज पेश किए सरकारी वकील प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि कुछ दिनों बाद 3 आरोपियों को दूनी पुलिस ने पकड़ लिया। फिर उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। बुधवार को इस मामले में आखिरी सुनवाई पूरी की। अभियोजना पक्ष की ओर से न्यायालय में 20 गवाह और 42 दस्तावेज पेश किए। कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा गया। गुरुवार को इसका फैसला सुनाया गया। विधि का काम अपराधियों में भय पैदा करना फैसले पर न्यायाधीश महावीर महावर ने टिप्पणी की। उन्होंने इस हत्या के निर्णय के आदेश में लिखा कि आहत (पीड़ित) को न केवल न्याय मिलना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी होना चाहिए। विधि का उद्देश्य समाज को सुरक्षित करना एवं अपराधियों को अपराध करने से रोकना एवं उनमें भय व्याप्त करना है। यह सही है कि मामले में सुरक्षित जगह घर के अंदर हत्या का अपराध हुआ है।


