मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को बुरहानपुर के पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार और अनियमितताओं को लेकर विधायक अर्चना चिटनिस ने आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार का ध्यानाकर्षण कराया। जिस पर मंत्री ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राचार्य डॉ. रश्मि रेखा मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जल्द व्यवस्थाओं में सुधार करने, गंभीर अनियमितिताओं की जांच का आश्वासन दिया। साथ ही शासकीय स्वशासी धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय और चिकित्सालय उज्जैन के प्रधानाचार्य डॉ. जेपी चौरसिया को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रधानाचार्य शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय बुरहानपुर का प्रभार सौंपा है। विधायक चिटनिस ने उठाया मामला विधानसभा में बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने कहा- हम सभी जानते हैं कि पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय बुरहानपुर राष्ट्र का लगभग 75 वर्ष पुराना महाविद्यालय है। इस महाविद्यालय से अध्ययनरत छात्र देश के अलग-अलग प्रदेशों में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे है। लेकिन, 14 साल पहले साल 2011 से 2018 तक डॉ. मिश्रा के प्रधानाचार्य प्रभार में रहने पर महाविद्यालय की प्रवेश मान्यता उनकी लापरवाही के कारण नहीं मिली थी। 2018 में डॉ. मिश्रा को प्रभार से हटाने के बाद आयुर्वेद महाविद्यालय बुरहानपुर को लगभग 10 वर्ष बाद सतत प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही मान्यता मिली थी, लेकिन डॉ. रश्मि रेखा मिश्रा के कारण महाविद्यालय की मान्यता निरस्त हो गई थी। जिसे फिर से प्रयास कर बहाल कराया गया। चिटनिस ने कहा कि आयुष विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है जिसके तहत प्रदेश में आयुर्वेद कॉलेजों का संचालन होता है। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्तमान 7 कॉलेजों के साथ ही 5 नए कॉलेज को स्वीकृति प्रदान की है। बुरहानपुर में एक प्राचार्य की वजह से आयुर्वेद कॉलेज का संचालन बाधित हो रहा है। इस विषय को लेकर सदन में मंत्री इंदरसिंह परमार का ध्यानाकर्षण किया। जिस पर उन्होंने उत्तर देते हुए संबंधित प्राचार्य को निलंबित करने, तत्काल विभागीय जांच कराने का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन की जांच में भी गंभीर अनियमितता मिली विधायक चिटनिस ने सदन में कहा कि बुरहानपुर कलेक्टर द्वारा महाविद्यालय में संचालित कार्यों की जांच कराई गई जिसमें हर साल ऑडिट न होना, आवश्यक कमियों की निर्धारित समय-सीमा में पूर्ति न होना, मरीजों को आवश्यक सेवाएं न मिलना, छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान न मिलना आदि 22 बिन्दुओं का प्रतिवेदन विभाग को प्रेषित किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई है।


