बुरहानपुर में अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकालने पर बैन:डीएफओ ने आदेश जारी किए, हाईकोर्ट में लगी थी याचिका

बुरहानपुर में वन विभाग ने सलई और धावड़ा सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ों से अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका और पेड़ों को हो रहे गंभीर नुकसान के बाद की गई है। जिले में लंबे समय से गोंद संग्राहकों द्वारा अधिक मात्रा में गोंद निकालने के लालच में अवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे सलई और धावड़ा के पेड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था। बुरहानपुर के पर्यावरणप्रेमी जितेंद्र रावतोले और जंबूपानी के शौकत अली ने इस संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के प्रमुख सचिव, जिला प्रशासन और वन विभाग को नोटिस जारी कर 2024 में लागू सलई गोंद प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लगाई रोक
उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद, बुरहानपुर के डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने सलई और धावड़ा गोंद के संग्रहण और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने अपने आदेश में बताया कि 14 फरवरी 2024 को तत्कालीन डीएफओ ने बुरहानपुर वनमंडल के आरक्षित और संरक्षित वन क्षेत्रों में सलई, धावड़ा, बबूल, कुल्लू, पलाश और खैर गोंद के संग्रहण और निस्तारण पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि, पिछले प्रतिबंध के बावजूद, संग्राहकों द्वारा अवैज्ञानिक तरीके से गोंद का विदोहन जारी था, जिससे पेड़ों को गंभीर क्षति पहुंच रही थी। इस अनियंत्रित दोहन से सलई और धावड़ा के पेड़ों का अस्तित्व समाप्त होने की आशंका बढ़ गई थी। डीएफओ ने मध्य प्रदेश वन उपज जैव विविधता का संरक्षण और पोषणीय कटाई नियम 2005 के तहत यह आदेश जारी किया है। यह प्रतिबंध आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा, ताकि पेड़ों को बचाया जा सके और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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