बूंदी जिले के दुगारी बांध के जीर्णोद्धार के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की गई है। यह घोषणा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में की। यह घोषणा विनियोग विधेयक के तहत की गई।
हालांकि, जल संसाधन विभाग के सामने असमंजस की स्थिति है, क्योंकि विभाग के अनुसार बांध के जीर्णोद्धार की आवश्यकता नहीं है, बल्कि ओवरफ्लो पानी को गांव में घुसने से रोकने की जरूरत है। पिछले 2 साल से ओवरफ्लो के कारण दुगारी गांव में बाढ़ की स्थिति बन रही है। सांसद और पूर्व मंत्री ने किया था दौरा
इससे पहले नैनवां जल संसाधन विभाग ने दुगारी बांध के ओवरफ्लो पानी को दुगारी गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए एक प्रस्तावित परियोजना के लिए बजट की मांग की थी। सांसद दामोदर अग्रवाल और पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने दुगारी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और अधिकारियों को विशेष बजट के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद दुगारी गांव और आसपास के क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी के निजी आवास पर जाकर उनका धन्यवाद और आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नैनवां के पूर्व प्रधान पदम नागर, धाकड़ समाज के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश नागर, दुगारी सरपंच रामलाल खिची और मानपुरा सरपंच पति आशाराम नागर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बांध का भराव स्तर 10 फीट
जल संसाधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दुगारी बांध रियासत काल में निर्मित हुआ था। बांध का भराव स्तर 10 फीट है और इसकी कुल भराव क्षमता 639 एमसीएफटी है। बांध के अपस्ट्रीम में 3 अन्य बांध (अन्नपूर्णा, खोड़ी और ग्वाला) और बड़ी का खाल एनीकट स्थित हैं। कई गांवों में बनते है बाढ़ के हालात
नैनवां तहसील में पिछले 2 साल से अत्यधिक बरसात हो रही है। दुगारी बांध से पानी की निकासी की क्षमता पर्याप्त नहीं होने के कारण जल निकासी की समस्या उत्पन्न हो रही है। बांध के ओवरफ्लो होने पर इसके डाउनस्ट्रीम में स्थित दुगारी, बांसी, उरासी, मानपुरा, बिजन्ता और भामर जैसे गांवों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। विशेष रूप से दुगारी गांव में तो बाजारों और मकानों में पानी घुस जाता है। दुगारी बांध में पूर्ण जल भराव के बाद पानी की सुरक्षित निकासी के लिए दुगारी बांध की बड़ा पारा की चादर पर बड़े गेट लगाकर नाले की निकास क्षमता बढ़ाया जाना आवश्यक है। चादर के दायीं व बांयी तरफ नाले में सुरक्षा दीवार बनायी जाना, जिससे दुगारी की तरफ कटाव नही हो, पानी की आसानी से निकासी के लिए चादर के डाउनस्ट्रीम के नाले की ट्रेचिंग कार्य कराया जाना, बांध की मोनिटरिंग के लिए चादर डाउनस्ट्रीम में एक पुल बनाकर नाले के दूसरी तरफ जाने का रास्ता बनाना शामिल था।


