बूचाका राजकीय स्कूल भवन 5 माह पहले जर्जर घोषित:यहां शिक्षक नहीं, सूरज की धूप तय करती है बच्चों की बैठने की व्यवस्था

शिक्षा से ही समाज और देश का विकास संभव है, लेकिन डीग जिले के नगर क्षेत्र में शिक्षा का ही विकास नहीं हो पा रहा है। इसकी जमीनी हकीकत गांव बूचाका के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में साफ नजर आती है, जहां भवन जर्जर घोषित होने के बाद पिछले करीब 5 महीनों से स्कूल बिना पक्के भवन के संचालित हो रहा है। हालात ऐसे रहे कि कभी कक्षाएं ग्रामीण के मकान में, कभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर चलाई गईं और अब बच्चे विद्यालय के सामने लगाए गए टिनशेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी खराब है कि यहां बच्चों की बैठने की जगह शिक्षक नहीं, बल्कि सूरज की धूप तय करती है। जैसे-जैसे धूप का रुख बदलता है, वैसे-वैसे विद्यार्थियों को भी अपनी जगह बदलनी पड़ती है। गौरतलब है कि बीते साल 19 अगस्त को विभागीय आदेशों में भवन के चारों कमरों को जीर्ण-शीर्ण घोषित कर दिया गया। कार्यरत दोनों अध्यापिकाओं द्वारा स्वयं के खर्चे पर भवन के सामने टिनशेड लगवाया गया। अब उसमें ही चार कक्षाएं संचालित हो रही है। ऐसे में पहली व तीसरी कक्षा के विद्यार्थी एक तरफ एवं चौथी व पांचवीं के विद्यार्थी इसी टिनशेड में इधर,उधर बैठने को मजबूर हैं। ​स्कूल की जमीन पर ग्रामीणों का अतिक्रमण इन दिनों गांव बूचाका के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के लिए 7446 वर्गमीटर भूमि आवंटित है। जिसमें ग्रामीणों ने पक्के निर्माण कर अतिक्रमण किया हुआ है। साथ ही खाली जगह पर घुरे व पशुओं के उपले थापकर कब्जा कर रखा है। जबकि स्कूल का भवन अनुपयोगी घोषित होने से विद्यार्थियों खुले में पढ़ रहे है। प्रशासन द्वारा पैमाइश कराकर सरकारी भूमि को कब्जे में लेने से भवन की समस्या से निपटा जा सकता है। चार कक्षाओं में 16 विद्यार्थी, दूसरी में 0 नामांकन राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पहली से पांचवीं तक कक्षाएं संचालित है। इनमें कक्षा पहली में चार, तीसरी में 4, चौथी में पांच व पांचवीं में तीन विद्यार्थी अध्ययनरत है। जबकि कक्षा दूसरी में नामांकन शून्य है। और उक्त 16 छात्र,छात्राओं पर दो अध्यापिकाएं कार्यरत है। “जिला कलेक्टर द्वारा गठित तकनीकी टीम ने विद्यालय का निरीक्षण कर भवन को जर्जर घोषित किया था। फिलहाल बतौर वैकल्पिक व्यवस्था एक टीनशैड डलवाकर विद्यार्थियों को शिक्षा अध्ययन कराया जा रहा है। विद्यालय में कक्षा-कक्ष निर्माण के लिए बीडीओ को अवगत कराया गया है।” – सियाराम गुर्जर, सीबीईओ

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