डायबिटीज के मरीज का एक्सीडेंट हो गया। पैर में चोट लगी। डॉक्टर ने एंटी बायोटिक लिखी। दवा लेने के बाद भी मरीज को फायदा नहीं हुआ। हालात बिगड़ती गई। आखिरकार हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। मरीज सेप्टी सिमिया में चला गया। यानी शरीर में इंफेक्शन फैलने लगा। जांच में पता चला कि मरीज बहुत कम एंटीबायोटिक को रिस्पॉन्ड करेगा। ये केस तो सिर्फ एक उदाहरण है। बैक्टीरियल इंफेक्शन में 60 से 80 फीसदी एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर होने लगी हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट की जांच में ये खुलासा हुआ है। इसकी वजह है लोगों का बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पीएम मोदी ने हाल ही में मन की बात कार्यक्रम में एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर चेताया। उन्होंने लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं का बिना जरूरत और बिना डॉक्टर्स की सलाह के इस्तेमाल नहीं करने का सुझाव दिया है। इसके पीछे एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए निमोनिया और यूरिन इंफेक्शन जैसी बीमारियों पर भी एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होने की बात कही। पीएम मोदी की इस सलाह के पीछे भविष्य की चिंता है। डॉक्टर्स का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग का यही हाल रहा तो आने वाले सालों में मामूली संक्रमण भी जानलेवा हो सकता है। कई एंटीबायोटिक दवाओं का 60 से 80 फीसदी तक रेजिस्टेंस
राजस्थान और देश में कई एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की जांच में 60 से 80% दवाओं पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सामने आया। प्रदेश में कई तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। इनमें से कई दवाएं धीरे-धीरे अब बेअसर होती जा रही है। एसिनेटोवेक्टर, सुडोमोनाज और क्लेपसेला ये तीन बैक्टेरिया गंभीर इंफेक्शन होते हैं और ये मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस होते हैं। Ampicillin : 85% Ceftazidime : 70-80% Ciprofloxcin : 70-80% Piperacillin-tozobactam : 60-70% Meropenem : 50-60% तीन चरणों में होती हैं एंटीबायोटिक दवाएं
WHO ने एंटीबायोटिक दवाओं के तीन अलग-अलग ग्रुप में रखा है। पहला एक्सेस ग्रुप, दूसरा वॉच और तीसरा रिजर्व ग्रुप होता है। पहले और दूसरे ग्रुप की कई दवाओं का रेजिस्टेंस हो गया है। एक्सेस ग्रुप में शामिल एंटीबायोटिक : Benzylpenicillin, Benzathine benzylpenicillin, Phenoxymethylpenicillin, Procaine benzylpenicillin, Ampicillin, Amoxicillin, Amoxicillin-clavulanate, Cefalexin, Cefazolin, Cloxacillin, Gentamicin, Amikacin, Spectinomycin, Doxycycline, Cotrimoxazole, Chloramphenicol, Nitrofurantoin, Clindamycin, Metronidazole (IV), Metronidazole (oral) वॉच ग्रुप में शामिल एंटीबायोटिक : Cefuroxime, Cefotaxime, Ceftriaxone, Ceftazidime, Cefixime, Ciprofloxacin, Azithromycin, Clarithromycin, Piperacillin-tazobactam, Meropenem, Vancomycin (IV), Vancomycin (oral) रिजर्व ग्रुप में शामिल एंटीबायोटिक : Ceftazidime-avibactam, Meropenem- vaborbactam, Colistin, Polymyxin B, Fosfomycin (IV), Linezolid, Cefiderocol, Plazomicin एंटीबायोटिक दवाओं के रेजिस्टेंस के कई कारण
एसएमएस मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी और सीनियर प्रोफेसर रजनी शर्मा बताती हैं- बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के लिए एंटीबायोटिक इस्तेमाल होती है। पिछले कुछ सालों में इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। लोग मामूली सर्दी-खांसी-बुखार होने पर भी बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक ले रहे हैं। ऐसे में अब इन दवाओं का असर कम होने लगा है। इसके अलावा एनिमल फीड में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के कारण भी इन दवाओं का रेजिस्टेंस होने लगा है। पशुओं को एंटीबायोटिक खिलाई जाती है, जो फूड चेन से इंसानों तक पहुंचती है। फार्मा इंडस्ट्री द्वारा वेस्ट वॉटर बॉडीज में डाल देने के कारण भी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा हो जाता है। इसके अलावा अस्पतालों में भी कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं और वहां कई तरह की एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है। जिसके कारण से वहां भी एंटीबायोटिक्स रजिस्टेंस हो जाता है। इनके चलते रिजर्व कैटेगरी की एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि नई एंटीबायोटिक्स की खोज नहीं हो रही है। अनुचित उपयोग के कारण कुछ चुनिंदा बैक्टीरिया ऐसे हैं, जिन पर कई तरह की एंटीबायोटिक कारगर नहीं होती हैं। एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर रेगुलेशन लाना जरूरी
एंटीबायोटिक्स दवाओं के मिस यूज को रोकने के लिए रेगुलेशन लाना जरूरी है। जिस तरह से प्रतिबंधित दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिल सकती हैं, उसी तरह से एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर भी कदम उठाने आवश्यक हैं। टोंक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सीनियर प्रोफेसर डॉ. लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि एंटीबायोटिक रजिस्टेंस एक ग्लोबल थ्रेट बन गया है। इसे लेकर जागरूकता की जरूरत है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डाॅ. पुनीत सक्सेना ने बताया कि राइट पाॅलिसी अपनाना जरूरी है। ये पॉलिसी है राइट पेशेंट, राइट एंटीबायोटिक, राइट डोज, राइट पीरियड ऑफ टाइम और राइट टाइम टू स्टॉप।


