बैतूल के आमला में तीन बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और चिता को मुखाग्नि दी। 69 वर्षीय पहलाद गुडाले, जो रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, के निधन के बाद उनकी बेटियों ने यह सामाजिक परंपरा तोड़ी। यह घटना आमला नगर के बंधा रोड बोडखी की है। पहलाद गुडाले पिछले तीन सालों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन के बाद, बेटियों रेशमा, रोशनी और रेणुका ने बेटे के समान सभी अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। रेशमा का विवाह मुकेश बेले से हुआ है और वह आमला की बोडखी में रहती हैं। रोशनी विवाहित हैं और लखनऊ में निवास करती हैं, जबकि अविवाहित रेणुका इंदौर एम्स में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान, तीनों बेटियों ने पारंपरिक सोच को दरकिनार करते हुए पिता की अर्थी को कंधों पर उठाया। उन्होंने पूरी श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ अंतिम यात्रा के सभी धार्मिक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन किया। बंधा रोड स्थित मोक्षधाम में बेटियों द्वारा पिता की चिता को मुखाग्नि देना समाज में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा गया। स्थानीय लोगों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि गुडाले परिवार की बेटियों ने समाज के लिए एक प्रेरणा स्थापित की है।


