जालंधर| पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोडवेज के सब-इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह के केस में अहम फैसला सुनाया है। पिछले साल सब-इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह को विभाग की तरफ से डिमोट कर दिया गया था। जिसे सुखविंदर सिंह की तरफ से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चैलेंज किया और इस सारे मामले पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रोडवेज के कर्मचारी की पदोन्नति डेजिगनेशन रद्द करने के सरकारी आदेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। सुखविंदर सिंह, जिसे कंडक्टर के पद से सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया था। उनकी तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें सुखविंदर ने विभाग के आदेशों 09.01.2026 और 19.01.2026 को चुनौती दी थी जिसमें विभाग की तरफ से उसे सब-इंस्पेक्टर की पदोन्नति को बिना किसी पूर्व सूचना के रद्द या वापस ले लिया गया था। इस केस में उन्होंने तर्क रखा कि पदोन्नति रद्द करने से पहले विभाग द्वारा जो मूल प्रिंसिपल है उनका पालन नहीं किया गया। कर्मचारी को ना तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही उसे व्यक्तिगत सुनवाई का कोई अवसर दिया गया। जिसके चलते विभाग द्वारा जारी किए पुराने आदेशों को वापस ले लिया जाएगा / रद्द माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि विभाग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए, कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा और व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देने के बाद ही नया आदेश पारित करेगा।


