बैज को चिट्ठी भेजकर राहुल ने जताया भरोसा:बोले-हमें न्याय की लड़ाई जारी रखनी होगी,नेतृत्व परिवर्तन के अटलकों-गुटबाजी के बीच PCC अध्यक्ष को नई मजबूती

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को चिट्ठी भेजकर न सिर्फ महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर निकाली गई पदयात्रा की सराहना की, बल्कि संगठन में उनके सक्रिय रोल को भी स्वीकारा है। राहुल गांधी की यह चिट्ठी ऐसे समय पर आई है, जब बैज को हटाने की अटकलें तेज थीं और पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ रही थी। हाईकमान के इस संदेश को बैज के पक्ष में समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को हटाए जाने की अटकलें लंबे समय से चर्चा में रहीं। विधानसभा चुनाव से लेकर नगर निकाय और लोकसभा तक लगातार हार मिलने के बाद पार्टी में बड़े बदलाव की संभावना जताई जाती रही है। इनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के अलावा अमरजीत भगत और इंद्रशाह मण्डावी जैसे कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं। जबकि कुछ नेताओं ने तो दिल्ली तक संगठन की कमान संभालने की दावेदारी की हैं। लेकिन इन तमाम राजनीतिक सरगर्मियों के बीच राहुल गांधी का यह पत्र, जिसने कांग्रेस के अंदर चल रही संभावित उठापटक को एक नया मोड़ दे दिया है। राहुल गांधी ने पत्र में लिखा, प्रिय दीपक बैज, आशा करता हूँ कि आप कुशल होंगे। मैं छत्तीसगढ़ कांग्रेस द्वारा महिलाओं के खिलाफ हो रहे भयावह अपराधों और राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ पदयात्रा निकालने के लिए आपकी सराहना करता हूँ। हमें न्याय की लड़ाई जारी रखनी होगी और लोगों तक आशा का संदेश पहुँचाना होगा। राहुल का यह पत्र सिर्फ एक साधारण सराहना नहीं बल्कि ये माना जा रहा है कि, छत्तीसगढ़ में संगठन के प्रति भरोसा बढ़ा है। ऐसे समय में जब बैज को हटाए जाने की अटकलें तेज थीं, यह पत्र राजनीतिक गलियारों में बड़ा संदेश देता दिख रहा है। बैज की सक्रियता बनी ‘ढाल’ दीपक बैज भले ही नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी से दूर रहे, लेकिन संगठनात्मक मोर्चे पर उन्होंने लगातार एक्टिव भूमिका निभाई। चाहे बलौदाबाजार की हिंसा हो, इंद्रावती नदी के संरक्षण का मुद्दा, प्रदेश में बढ़ते अपराध या जवानों का हौसला बढ़ाने की जरूरत हर मौके पर उन्होंने यात्राएं निकालकर जनता से संवाद कायम किया। इन यात्राओं ने प्रदेश के भीतर ही नहीं, बल्कि दिल्ली में भी कांग्रेस हाईकमान का ध्यान खींचा। यही वजह है कि राहुल गांधी का यह पत्र अब सिर्फ प्रशंसा नहीं, बल्कि मौजूदा नेतृत्व के प्रति समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बैज के कार्यक्रमों में नहीं दिखे बड़े नेता महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस की ओर से दुर्ग से एक पदयात्रा निकालने की तैयारी थी। यह यात्रा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में होनी थी, लेकिन दुर्ग में हुए एक रेप केस में आरोपी की गिरफ्तारी और DNA जांच में पुष्टि के बाद यह पदयात्रा स्थगित कर दी गई। इसके बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री निवास घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों और कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। इस प्रदर्शन में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज खुद मौजूद रहे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण अभियान में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नजर नहीं आए। पूरे कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू ही थे जो बैज के साथ खड़े दिखे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव जैसे बड़े नाम पूरी तरह से नदारद रहे। इससे पार्टी के भीतर एकजुटता और नेतृत्व के प्रति समर्थन को लेकर कई सवाल उठे हैं। इसके अलावा बस्तर में हुई इंद्रावती बचाओ पदयात्रा में भी प्रदेश स्तर के कोई नेता नहीं पहुंचे। इतना नहीं जवानों के सम्मान में निकाली गई तिरंगा यात्रा में भी चरणदास महंत और अमरजीत भगत के अलावा दूसरे नेता दिखाई नहीं दिए। सियासी हलचल तेज, संदेश साफ? कांग्रेस के भीतर चल रही खामोश खींचतान के बीच राहुल गांधी का पत्र उस वक्त आया है जब प्रदेश नेतृत्व को लेकर चर्चाएं फिर तेज थीं। पत्र ने बैज समर्थकों को मजबूती दी है, जबकि विरोधी गुट अब असमंजस की स्थिति में हैं। पत्र के बाद कयास यही लगाए जा रहे हैं कि हाईकमान अब प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जल्दबाजी में नहीं है, बल्कि मैदान में सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता देने के मूड में है। राहुल गांधी के पत्र से यही संकेत भी मिलते हैं।

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