बोहरा समाज में हिजरी वर्ष 1447 का सबसे पवित्र महीना रमजान कल (17 फरवरी) से आरंभ हो रहा है। पहला रोजा मंगलवार से रखा जाएगा और पूरे 30 दिन चलेंगे। अंतिम रोजा 18 मार्च को होगा और 19 मार्च गुरुवार को ईदुल फ़ितर मनाई जाएगी। 10 मार्च, मंगलवार की रात शबेकद्र के रूप में मनाई जाएगी, जिसमें समाज के सभी सदस्य रातभर जागरण कर मस्जिद में इबादत करेंगे। सूरत से आमिल जनाब मोइज भाई साहब बदरी, बोहरा समाज के लोगों को इबादत कराने और इमामत करने के लिए तशरीफ लाए हैं। रमजान के दौरान बोहरा समाज में प्रत्येक समाजजन को सेहरी और इफतार का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय बोहरा मस्जिद में पूर्ण एहतमाम और सम्मान के साथ आमिल मोइज भाई साहब द्वारा इमामत की जाएगी। 30 दिन सुबह-शाम खाना पहुंचाएंगे सैयदना साहब
पूरे महीने के 30 दिनों तक समाजगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब की ओर से सभी समाजजनों के घरों तक सुबह और शाम का भोजन पहुंचाने का इंतजाम किया गया है, ताकि किसी को स्वयं खाना बनाने की आवश्यकता न पड़े। इस व्यवस्था की देखरेख अलिअकबर राही द्वारा की जाएगी।ॉ सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक सेहरी
सेहरी का अंतिम समय सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जिसमें चाय, शक्कर, टोस्ट और अंडा शामिल होंगे। इफ्तार के समय मुंबई से निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन में दो सब्ज़ियां, रोटी, बिस्कुट, दूध, खजूर और चाय शामिल रहेंगी। बोहरा समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि रमजान शब्द ‘रम्ज़’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है सूर्य की अत्यधिक गर्मी से छोटे पत्थरों का तपना। यह महीना ईश्वरीय नामों में से एक है और इसी महीने में पवित्र कुरआन नाजिल हुआ था। रमजान को बरकतों वाला महीना माना जाता है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों को असीम नियामतों से नवाजते हैं। रोज़ा अरबी में ‘सौम’ कहलाता है, जिसका अर्थ है रुकना। उन्होंने कहा कि रोजा केवल भूख और प्यास से नहीं, बल्कि तमाम बुराइयों से परहेज़ करना भी है। इसमें गलत बोलना, देखना, सुनना या नाजायज़ कर्म करना वर्जित है और हर समय खुदा की इबादत करना आवश्यक है। पूरा माह रमजान समाज के लिए आत्मसंयम, भक्ति और इबादत का अवसर है, जिसमें हर सदस्य अपने जीवन में नैतिकता, परहेज़ और सामाजिक भलाई को अपनाता है।


