बौंली के सबसे बड़े फूलडोल मेले का आगाज:मिट्टी के बर्तनों की 100 दुकानें लगी, झूले-चकरी भी सजे

बौंली नगर पालिका क्षेत्र में बुधवार को ऐतिहासिक फूलडोल मेले का शुभारंभ किया गया। नगर पालिका प्रशासन के तत्वाधान में बौली के रामशाला चौक पर तीन दिवसीय मेले का आगाज किया गया। हर साल होली के बाद रामशाला चौक पर बौंली इलाके का सबसे बड़ा व प्रसिद्ध फूलडोल मेला आयोजित होता है। 100 से अस्थाई दुकानें लगी गौरतलब है लंबे अरसे से चली आ रही परंपरा के तहत बौंली कस्बे का सबसे बड़ा फूलडोल मेला आज से शुरू हुआ। मेला स्थल पर झूले- चकरी, रेहटक सहित जंपिंग यार्ड व अन्य संसाधन लगाए गए। मेला स्थल पर 100 से अधिक अस्थाई दुकानें भी लगाई गई।गौरतलब है कि फूलडोल मेला पूरे इलाके में मिट्टी के बर्तनों व लोहे के सामानों की बिक्री के लिए प्रसिद्ध है। मेले में विशेष मिट्टी से निर्मित काले मटको की बंपर बिक्री देखी गई। प्रथम दिन मेले में सैकड़ो महिलाएं, युवक- युवतियां व स्थानीय लोग पहुंचे। जहां झूले चकरी का जमकर लुत्फ उठाया।साथ ही महिलाओं ने भी मेले में जमकर खरीदारी की। युवक युवतियों व किशोर वर्ग ने भी मेला स्थल पर फास्ट फूड का जमकर आनंद लिया। नगर पालिका प्रशासन द्वारा मेला स्थल पर व्यापक इंतजाम किए गए। भीड़ की संभावना के मद्देनजर डीएसपी उमेश गुप्ता के सुपरविजन व एसएचओ जितेंद्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर माकूल इंतजाम किए गए। मनचलो व चैन स्नेचर पर नियंत्रण रखने के लिए मेला स्थल पर जाब्ता तैनात किया गया। समय के साथ जगह पड़ने लगी कम दरअसल, बौंली कस्बा पूर्व में पंचायत था। तब से हर वर्ष पंचायत प्रशासन के नेतृत्व में होली के बाद तीन दिवसीय मेला लगाया जाता है। हालांकि अब बौंली कस्बा नगर पालिका में कर्मोन्नत हो चुका है। साथ ही कस्बे की आबादी भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में मेला स्थल पर जगह का अभाव रहता है। इस दौरान मेले में आने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूर्व में भी स्थानीय लोगों ने मेला स्थल परिवर्तित कर अन्य स्थान पर मेला लगाए जाने की मांग रखी थी। हालांकि नगर पालिका प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मामले में अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। फिलहाल तीन दिवसीय मेले को लेकर स्थानीय लोग खासे रोमांचित हैं। फोटो/वीडीओ-आशीष मित्तल।

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