दिंगबर जैन संत आचार्य प्रज्ञासागर ने एक करोड़ पौधे लगवाने का संकल्प लिया है। प्रवास और विहार के दौरान प्रवचन के साथ पाैधे लगवाना उनकी प्राथमिकता में है। गांवाें, कस्बाें और शहराें में पौध लगवाकर इनका िजम्मा श्रावकाें काे साैंपते हैं। अब तक करीब सवा लाख पौधे लगवा भी चुके हैं। महाराज इन दिनाें काेटा में विराजे हैं। यहां भी पाैधे लगवाए हैं। मार्च में 3 संयमार्थियाें काे दीक्षा देंगे। परंपरा से हटकर जैन भगवती दीक्षा का यह महाेत्सव भी 100 से अधिक पुराने पेड़ के नीचे हाेगा। आचार्य प्रज्ञासागरजी संकल्प के पीछे साेच बताते हैं ‘वृक्ष है तो जीवन है।’ कहते हैं, अगर धरती हरी-भरी रहेगी तो हमारा जीवन स्वस्थ व समृद्ध रहेगा। पौधरोपण की शुरुआत उज्जैन से की। राजस्थान में सुसनेर में 1 हजार, पिड़ावा में 1 हजार, झालरापाटन में तीन चरण में 4608, झालावाड़ शहर में 108, पिड़ावा की 40 पंचायतों में 10 हजार, आगर मालवा में 350, उज्जैन में 245, बड़ौदा में 2000, भरूच में 108, मुंबई में 108, कोटा के महावीरनगर विस्तार योजना में 108, स्मृति वन में 11, जगपुरा में 51 व रानपुर में 71 पाैधे लगा चुके हैं। सकल दिगंबर जैन समाज के कार्यकारी अध्यक्ष जेके जैन ने बताया कि झालावाड़ में महाराज का चातुर्मास था। वहां से विहार करते हुए काेटा पधारे। यहां स्मृतिवन में 80 बीघा जमीन ली है, जहां प्रज्ञासागर वाटिका विकसित करेंगे। इसमें 11 हजार पौधे लगाए जाएंगे। समाज के इच्छुक व्यक्ति को 11-11 पौधाें की देखरेख की जिम्मेदारी देंगे। 100 साल पुराने वृक्ष के नीचे दीक्षा
आचार्य प्रज्ञासागर का कहा है कि तीर्थंकराें की दीक्षा जंगलाें में पेड़ाें के नीचे ही हुई। महावीर स्वामी ने वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। शांतिसागर महाराज की दीक्षा भी पेड़ के नीचे हुई थी। इसीलिए हम 2 मार्च काे काेटा में भी दीक्षा महाेत्सव पेड़ के नीचे करने जा रहे हैं। तब तीन साधकों को सूरत के देवेंद्र, उज्जैन की मीना और इंदौर की प्रेमलता जैन काे संत दीक्षा देंगे। इसके लिए थेगड़ा रोड पर स्थान देखा है। वहां काेई पांडाल नहीं बनेगा। देशभर से आने वाले समाजजनाें काे पौधरोपण का संकल्प दिलाएंगे।


