भास्कर न्यूज | राहौद गादी दाई एवं ठाकुरदेव समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा व्यासपीठ से आचार्य देव कृष्ण महाराज ने भगवान नाम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम सर्वोपरि है और यदि चिंतन में भगवान स्मरण बने रहे तो प्रत्येक कर्म पूजा के समान बन जाता है। उन्होंने कहा कि उपहास या परिहास में भी यदि भगवान का नाम मुख से निकल जाए तो वह मनुष्य के पापों का नाश कर देता है। आचार्य ने अजामिल प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि अजामिल ने भगवान के पार्षदों से विशुद्ध भागवत धर्म और यमदूतों से वेदोक्त सगुण धर्म का श्रवण किया। इससे उसके हृदय में भक्ति का उदय हुआ और वह पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है। सत्संग और भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने भावी जन्म को सुधार सकता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान अवतार लेकर सनातन धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए प्रकट होते हैं। प्रह्लाद प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि भक्त भगवान को साक्षात प्रकट होने के लिए विवश कर देता है। उन्होंने कहा कि भगवान सृष्टि के कण-कण में विद्यमान हैं। गजेंद्र मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार श्रीहरि ने गजेंद्र को ग्राह से मुक्ति दिलाई, उसी तरह मनुष्य मोह-माया और समस्याओं रूपी बंधनों से केवल हरि स्मरण और भक्ति के माध्यम से ही मुक्त हो सकता है। पंडित देव कृष्ण शर्मा ने समुद्र मंथन प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से निकले अमृत से भी अधिक महत्वपूर्ण कथा अमृत है। देवताओं और दानवों ने समान परिश्रम किया, पर अमृत केवल देवताओं को प्राप्त हुआ। उसी प्रकार कथा अमृत भी उन्हें मिलता है जिनका मन भगवान में रमा होता है। चौथे दिन की कथा में वामन अवतार और श्रीकृष्ण प्राकट्य की झांकी प्रस्तुत की गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नंद उत्सव मनाया। नगर के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर दिव्य सत्संग का लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा का क्रम इसी प्रकार जारी रहेगा।


