भास्कर न्यूज | खंडसरा संतान गोपाल यज्ञ के दौरान श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। यज्ञ में कथावाचक पंडित प्रमोद शास्त्री ने माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि शबरी की भक्ति में इतनी शक्ति थी कि स्वयं भगवान को उनके पास आना पड़ा। उन्होंने कहा कि विचारों की पवित्रता ही मनुष्य के भाव और स्वभाव का निर्माण करती है। माता शबरी ने भील परिवार में जन्म लेने के बावजूद अपने विचारों को उच्च रखा, जिसके कारण आज पूरा समाज उन्हें भक्ति की प्रतीक के रूप में स्वीकार करता है। विपरीत परिस्थितियों को सहते हुए प्रभु मिलन की आशा में स्वयं को समर्पित करने वाली शबरी को अंततः भगवान श्रीराम का सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह प्रसंग बताता है कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। भक्त स्नेहपूर्वक जो भी अर्पित करता है, प्रभु उसे सहज स्वीकार कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस वन में रहकर माता शबरी ने प्रभु की आराधना की, वह त्याग, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रतीक है। सच्चे मन और निष्कपट भाव से की गई आराधना ही भगवान तक पहुंचाती है। रविवार को यज्ञ की पूर्णाहुति व शोभायात्रा और महाआरती के साथ समापन होगा। कार्यक्रम में आयोजन समिति के प्रमुख शरद जोशी, निवेदिता जोशी, जनपद सदस्य बीरबल वर्मा सहित देवेन्द्र मारकंडे, रामू पटेल, कुलेश्वर साहू, कमल साहू, नत्थू राम साहू, निरंजन चंद्राकर, रामानंद पटेल, विजय साहू, लक्ष्य सिन्हा आदि शामिल रहे।


