भास्कर न्यूज | उदयपुर सरगुजा जिले की जीवनदायिनी रेणुका नदी के तट पर स्थित जमदग्नि ऋषि की तपोस्थली, देवगढ़, महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवभक्ति के रंग में सराबोर रही। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए क्षेत्र सहित दूर-दराज के शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में देवगढ़ मंदिर के द्वार भक्तों के लिए आधी रात को ही खोल दिए गए थे। देखते ही देखते मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। सुबह होते-होते कतारें लगभग 200 मीटर तक लंबी हो गई थीं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। प्रशासन और समिति द्वारा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई थी। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी रेणुका नदी में लगाई और पूरी श्रद्धा के साथ पूजन सामग्री (नारियल, बेलपत्र, दूध, धतूरा, अक्षत और पंचामृत) लेकर मंदिर पहुंचे। गर्भगृह में विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक कर भक्तों ने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर में शिव भजनों की मधुर ध्वनि से माहौल भक्तिमय बना रहा। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का उत्सव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजन करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना गया है।


