भजनों, झांकियों और पुष्पवर्षा के बीच निकली भगवान शिव की सवारी

भास्कर न्यूज | जालंधर धर्म और आस्था की नगरी जालंधर बुधवार को पूरी तरह शिवमय नजर आई। मौका था- महाशिवरात्रि के पावन पर्व के उपलक्ष्य में जय शंकर मंदिर (पंजपीर बाजार) द्वारा आयोजित की गई विशाल शोभायात्रा का। बुधवार को निकाली गई भव्य यात्रा में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा शहर बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ जय शंकर मंदिर के पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत पूजन से किया गया। जैसे ही शंख ध्वनि हुई, माहौल में एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। पूजन के पश्चात बड़ी संख्या में उमड़े भक्तों ने प्रभु की प्रतिमा के समक्ष माथा टेका और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व खुशहाली के लिए प्रार्थना की। हर वर्ष की परंपरा को कायम रखते हुए इस बार भी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। शोभायात्रा का समापन देर शाम जय शंकर मंदिर में भगवान शिव की भव्य आरती के साथ हुआ। आरती के पश्चात महादेव को छप्पन भोग लगाया गया और उपस्थित जनसमूह में प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां पंडित लखी राम, निर्मल सिंह बेदी, केवल पहलवान, बिट्टू सचदेवा, राजू, हैप्पी आनंद, हर्ष दुआ, सतपाल, संजय नैय्यर, निशू नैय्यर, एचडी मल्होत्रा, टिंकू जैन, सौरभ, ईशू, शुभम, विकास, सुमित, गुलशन, विजय चौहान व अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे। शोभायात्रा का सबसे आकर्षक पहलू शिव भक्तों का अटूट विश्वास था। भजनों की मधुर धुनों पर भक्त झूमते-नाचते दिखाई दिए। शंकर का डमरू बाजे रे कैलाशपति शिव नाचे रे… और भोला तेरा डम-डम डमरू बाजे, मस्तक पे चंदा साजे… जैसे भजनों ने पूरे बाजार को भक्तिमय कर दिया। डमरू की थाप और झांझ-मजीरों की गूंज के बीच शिव भक्त पूरी तरह शिव की भक्ति में लीन नजर आए। इस दौरान मुकुल घई ने भजनों का गुणगान करके भक्तिमय माहौल बनाया गया। पंजपीर बाजार से शुरू हुई यह शोभायात्रा शहर के मुख्य व्यापारिक और रिहायशी हिस्सों से होकर गुजरी। शोभायात्रा जय शंकर मंदिर, पंजपीर बाजार, गुरुद्वारा पंज प्यारे, अटारी बाजार, बोहड़ वाला चौक, पीर बोदलां बाजार, शेखां बाजार, फुल्लां वाला चौक, हनुमान चौक, जग्गू चौक, भैरों बाजार, किला मोहल्ला और खिंगरा गेट से होते हुए वापस मंदिर। यात्रा के दौरान जगह-जगह स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने पुष्प वर्षा कर शिव की पालकी का स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए लंगर और जलपान की व्यवस्था भी की गई थी। शोभायात्रा में शामिल झांकियां भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। भगवान शिव के तांडव स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। शिव-पार्वती, राधा- कृष्ण और श्री बालाजी के जीवंत स्वरूपों ने सबका मन मोह लिया। महाकाली, खाटू श्याम जी की पालकी के साथ-साथ श्री बालाजी की रथ यात्रा देखने लायक रही। यात्रा के दौरान विद्वानों ने भक्तों को संबोधित करते हुए जीवन में आध्यात्मिकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति केवल मुसीबत आने पर ही ईश्वर को याद करता है, जबकि मंदिर जाकर प्रभु के चरणों में कुछ समय ध्यान मग्न होना मानसिक शांति के लिए अनिवार्य है। मनुष्य को निस्वार्थ भाव से प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। मंदिर जाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने का माध्यम है। प्रभु का धन्यवाद केवल काम निकलने पर ही नहीं, बल्कि हर सांस के लिए करना चाहिए।

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