भास्कर न्यूज| भरतपुर जिले के सेवर ब्लॉक स्थित महात्मा गांधी नगला भगत स्कूल की बीते शनिवार को बड़ा हादसा टल गया, जब विद्यालय के बरामदे की जर्जर छत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई, जिसका वीडियो रविवार को वायरल हुआ। हालांकि गनीमत रही कि उस समय वहां कोई छात्र मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल भवन की हालत लंबे समय से खराब थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छत से पहले भी प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी थीं। स्कूल इंचार्ज कविता फौजदार ने बताया 27 फरवरी को स्कूल बरामदे की छत से मिट्टी झरने लगी थी। वहां हमने रस्सी बांध बच्चों को जाने से मना कर दिया था, जिससे गनीमत रही कि 28 फरवरी की दोपहर 12 बजे के समय छत गिरने के वक्त किसी भी बच्चे को नुकसान नहीं हुआ। हालांकि स्कूल में पांच कमरे हैं बच्चों के बैठने की पूरी व्यवस्था है स्कूल में 28 बच्चे हैं कक्षा 1 से 7 तक के बच्चे पढ़ते हैं। 465 स्कूलों के 1353 कमरे जमींदोज के आदेश:- कलेक्टर द्वारा कराए गए सर्वे में 19 स्कूलों की पूरी तरह से बिल्डिंग को तोड़ने की आदेश दिए गए थे। वही 955 स्कूलों का सर्वे कराया गया था उसे सर्वे में 465 स्कूलों के 1353 कमरों को जमींदोज करने की आदेश दिए गए थे, लेकिन बजट न होने की वजह से वह आदेश सिर्फ कागजों में ही रह गए। इसके अलावा दोबारा से स्कूलों का सर्वे करने का आदेश ऊपर से आ रखा था। भास्कर ने 4 फरवरी 2026 पहले ही खबर चलाई थी कि जर्जर स्कूलों के लिए बजट नहीं इधर विभाग सिर्फ सर्वे पर सर्वे करा रहा। सरकारी स्कूलों के भवनों की निगरानी करने के लिए 12 ब्लॉकों में से 8 इंजीनियरिंग की हर ब्लॉक पर तैनाती कर रखी थी। हालांकि 6 फरवरी 2026 को सेवर व कुम्हेर के 2 जेईएन को एसीबी ने ट्रेप किया था, जिसके बाद से 6 जेईएन तैनात हैं, जिनका काम स्कूलों की मॉनिटरिंग करना है, इसके बावजूद भी बिन बरसात के भी स्कूलों की बिल्डिंग धड़ाधड़ गिर रही हैं, जबकि समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में कराए गए निर्माण और भवनों की गुणवत्ता व मॉनिटरिंग के लिए अलग से सिविल शाखा बनी हुई है। हालात यह है कि इस शाखा और संस्था प्रधानों के बीच कोई तालमेल नहीं है। इससे पहले 2025 झालावाड़ घटना के समय समसा के अभियंताओं पर विश्वास न होने पर कलेक्टर द्वारा खुद की अलग से टीम बनाकर जर्जर भवनों की अलग से जांच करवा कर सूची तैयार कराई गई थी उसके बावजूद भी इस पुराने भवन की तरफ ध्यान तक नहीं दिया गया। ^स्कूल की इमारत जर्जर नहीं थी इसलिए जर्जर घोषित नहीं किया। 27 फरवरी को स्कूल बरामदे की बस थोड़ी सी ही मिट्टी झड़ रही थी। अचानक से छत गिरी है। स्कूल के बच्चों के पढ़ने के लिए पर्याप्त कमरे हैं। – सुरेंद्र गोपालिया, डीईओ माध्यमिक महात्मा गांधी स्कूल नगला भगत की झालावाड़ की घटना के बाद मॉनिटरिंग कराई गई थी। उस समय स्कूल की इमारत को तकनीकी जांच करने के लिए प्रिंसिपल को भेजा गया था। स्कूल इंचार्ज कविता फौजदार ने बताया की स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरीके से ठीक थी लेकिन बिल्डिंग बहुत पुराने समय की है। झालावाड़ घटना के बाद एक बार स्कूल की मॉनिटरिंग करने के लिए कुछ लोग आए थे लेकिन वह अभियंता नहीं थे किसी स्कूल के प्रिंसिपल आए थे इसलिए हमारे स्कूल की बिल्डिंग जर्जर घोषित नहीं हुई थी।


