बेटे की मौत के आंसू सूखे भी नहीं थे कि भांकरोटा अग्निकांड ने टेमू देवी को एक और दर्द दे दिया। चार माह पहले बेटे को खो चुकी टेमू देवी अब एसएमएस के बर्न आईसीयू के बाहर पति बंसीलाल के लिए प्रार्थना कर रही है। पति के बारे में पूछते ही दर्द से भर उठती है। कुछ देर बाद आंखों से आंसू पोंछकर रूंधे गले से कहती हैं- 4 माह पहले 18 साल के बेटे की बीमारी से मौत हो गई और अब पति के साथ ये हो गया। पहले पति डंपर चलाते थे। वर्ष 2009 में एक दिन करंट लग गया और रीढ़ की हड्डी खराब हो गई। चलने में परेशानी हो गई। धीरे-धीरे सुधार होने लगा, जैसे तैसे पांच-छह सालों में डंडे के सहारे चलने लगे। लगातार नहीं चल पाते थे, लेकिन बैठकर करने वाला काम करने लगे थे। कहते थे- वापिस गाड़ी चला लूंगा, मगर शुक्रवार सुबह पता चला कि वे जल गए। एसएमएस पहुंचे तो उनकी हालत के बारे में पता चला। भतीजे देवकरण ने बताया कि चाचा बंसीलाल सुबह बगरू घर से जयपुर के लिए निकले थे। उन्हें चलने के लिए लकड़ी के सहारे की जरूरत होती थी। जिस ट्रक में जयपुर आ रहे थे, उसका ड्राइवर गाड़ी और उन्हें बैठा छोड़कर भाग गया। उनकी रीढ़ की हड्डी में परेशानी थी और डंडे की जरूरत होती थी, लेकिन ड्राइवर उन्हें डंडा भी नहीं देकर गया। यदि वह भागते समय डंडा भी दे जाता तो वे बच सकते थे। 6 बेटियों का सहारा है यूसुफ, कमाने निकले थे, अब जिंदगी के लिए लड़ रहे
45 साल के यूसुफ एसएमएस के बर्न आईसीयू में जिंदगी के लिए लड़ रहे हैं। यूसुफ के छह बेटियां हैं और किसी को समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें इस हालत के बारे में कैसे बताएं। यूसुफ के भाई साकिर ने बताया कि वे 14 नंबर से बगरू की तरफ आ रहे थे। कोई साधन नहीं मिला तो ट्रक में बैठ गए। हमें सुबह साढ़े छह बजे फोन आया और एसएमएस पहुंचे। यहां हालत का पता चला तो सन्न रह गए। पूरे परिवार की कमर टूट गई है और किसी को समझ नहीं आ रहा है कि इन हालात से कैसे निकला जाए।


