भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने 24 फरवरी 2026 को प्रस्तुत राज्य बजट को ‘जन-विरोधी’ और ‘पूंजीपरस्त’ बताया है। भाकपा के तिलक पांडे और सचिन मंडल सदस्य ने कहा कि यह बजट किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और युवाओं की समस्याओं की अनदेखी कर कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बजट में किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कोई गारंटी नहीं दी गई है, न ही सिंचाई या बीज सब्सिडी में वृद्धि की गई है। मजदूर वर्ग के लिए न्यूनतम वेतन या पेंशन में भी कोई प्रावधान नहीं है। कोंडागांव जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में विकास योजनाओं, जैसे सड़कें, स्कूल और अस्पताल, की उपेक्षा की गई है। भाकपा के अनुसार, यह बजट पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता देता है। बजट में आदिवासियों और युवाओं के साथ धोखा भाकपा ने आदिवासियों और युवाओं के साथ भी धोखे का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 32% आदिवासी आबादी के लिए वनभूमि अधिकार या स्वास्थ्य योजनाओं में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। कोंडागांव जैसे आदिवासी बहुल जिलों को ‘नक्सल बहाना’ बनाकर वंचित रखा गया है। युवाओं को रोजगार के नाम पर खोखले वादे दिए गए हैं, जबकि सरकारी नौकरियों या कौशल प्रशिक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। बजट में 20% से अधिक की बेरोजगारी दर पर भी चुप्पी साधी गई है। बजट में बड़े उद्योगों को इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज दिए जाने पर भी भाकपा ने आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि एक ओर जहां बड़े उद्योगों को लाभ दिया जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कटौती की गई है। महंगाई, बेरोजगारी और राजकोषीय घाटे को नजरअंदाज कर ‘विकास’ का दावा किया गया है। विपक्षी कांग्रेस ने भी इस बजट को ‘फीका और निराशाजनक’ बताया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इस ‘जन-विरोधी’ बजट का पुरजोर विरोध करने की घोषणा की है। पार्टी ने किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और युवाओं से एकजुट होकर इस बजट के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया है।


